पाकिस्तान का बड़ा खेल, लाल सागर में मुस्लिम देशों को देगा एडवांस हथियार, भारत की सुरक्षा पर मंडराया संकट
Pakistan Arms Deal: अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में गृहयुद्ध की आग लगातार भड़क रही है. इसी बीच पाकिस्तान ने सूडान की सैन्य सरकार के साथ 1.5 अरब डॉलर के हथियार सौदे को अंतिम रूप दिया है. यह सौदा न केवल सूडानी सशस्त्र बलों (SAF) को अत्याधुनिक हथियार मुहैया कराएगा, बल्कि अफ्रीका के लाल सागर गलियारे को इस्लामी धुरी राष्ट्रों के लिए संभावित युद्धक्षेत्र में बदल सकता है.
Pakistan Arms Deal in Hindi: सौदे की विस्तृत जानकारी
न्यूज-18 की रिपोर्ट के अनुसार, इस हथियार सौदे के तहत SAF को प्राप्त होने वाले उपकरणों में 10 K-8 कराकोरम हल्के अटैक एयरक्राफ्ट, मिग-21 इंजन, शहपर-II, YIHA-III, MR-10K और अबाबील-5 ड्रोन सिस्टम, 150 मोहाफिज बख्तरबंद वाहन और HQ-6/9 एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं. पाकिस्तान इस सौदे को अपनी आर्थिक स्थिति के लिए जरूरी बता रहा है, लेकिन विशेषज्ञ इसे चीन की अफ्रीका रणनीति का हिस्सा मानते हैं, जिसमें पाकिस्तान केवल ‘फ्रंट सप्लायर’ की भूमिका निभा रहा है.
सौदे के पीछे राजनीतिक और सैन्य कनेक्शन
सूचना के अनुसार, सूडानी एयर फोर्स के प्रमुख एल ताहिर मोहम्मद एल अवाद एल अमीन ने हाल ही में इस्लामाबाद का दौरा किया और पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ तथा एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिधु के साथ बैठक की. माना जा रहा है कि इसी दौरानी बातचीत में यह सौदा अंतिम रूप दिया गया.
विश्लेषकों के अनुसार, यह हथियार सौदा सूडानी सेना को मुस्लिम ब्रदरहुड समर्थित ब्रिगेडों जैसे अल-बारा इब्न मलिक के साथ मिलकर सैन्य बढ़त हासिल करने में सक्षम बनाएगा. इस समय, तुर्की, पाकिस्तान और कतर SAF का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई मुस्लिम देश, जिनमें यूएई शामिल है, रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) का समर्थन कर रहे हैं.
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गृहयुद्ध में संभावित असर
सूडान का गृहयुद्ध पिछले दो वर्षों से चल रहा है और अब तक 70,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान से प्राप्त अत्याधुनिक हथियार SAF के पक्ष में युद्ध का निर्णय बदल सकते हैं और गृहयुद्ध में विजेता निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.
भारत और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर असर
इस सौदे से भारत के लिए भी खतरे की घंटी बजी है. विश्लेषकों के अनुसार, ‘पाकिस्तान-तुर्की-कतर-चीन एक्सिस’ लाल सागर और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में इस्लामी रणनीतिक गलियारा बनाने की कोशिश कर रहा है. यमन संकट और सोमालिया में अस्थिरता के बीच यह क्षेत्र अब पाकिस्तान-चीन समर्थित इस्लामिक धुरी के प्रभाव में आ सकता है. इससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और नौसैनिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है.
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