China: ताइवान और चीन के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है. ताइवान के रक्षा मंत्रालय (MND) ने जानकारी दी कि गुरुवार सुबह 6 बजे तक उसके आसपास चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के 41 सैन्य विमान, सात नौसैनिक जहाज और एक आधिकारिक जहाज देखे गए. मंत्रालय ने बताया कि इनमें से 21 विमान मध्य रेखा पार करके ताइवान के उत्तरी, मध्य और दक्षिण-पश्चिमी एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) में प्रवेश कर गए. ADIZ वह क्षेत्र होता है जहां प्रवेश करने वाले विमानों की पहचान करना जरूरी होता है ताकि देश अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सके.
लगातार घुसपैठ की कोशिशें (China)
गुरुवार से पहले बुधवार को भी इसी तरह की स्थिति बनी थी. उस दिन ताइवान ने PLA के 23 विमानों, सात नौसैनिक जहाजों और एक आधिकारिक जहाज की मौजूदगी दर्ज की थी. इनमें से 16 विमान मध्य रेखा पार कर ताइवान के उत्तरी और दक्षिण-पश्चिमी ADIZ में दाखिल हुए थे. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ताइवान की सेना हालात पर लगातार नजर रख रही है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं.
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चीन पर क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने का आरोप (China)
ताइवान के विदेश मंत्री लिन चिया-लंग ने चीन को “क्षेत्रीय उपद्रवी” करार दिया. उन्होंने यह बयान तब दिया जब सोलोमन द्वीप ने ताइवान और अमेरिका सहित कुछ अन्य देशों को प्रशांत द्वीप समूह फोरम (PIF) नेताओं की बैठक से बाहर कर दिया. लिन ने कहा कि “प्रशांत तरीका” यही होना चाहिए कि सभी को शामिल किया जाए. अगर कुछ देशों को बाहर किया जाएगा तो इससे फोरम की ताकत कमजोर होगी और साझा चुनौतियों का समाधान मुश्किल हो जाएगा.
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चीन के दावे को झूठ बताया (China)
लिन ने चीन के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें कहा जाता है कि ताइवान चीन का हिस्सा है. उन्होंने साफ कहा कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना ने कभी एक दिन भी ताइवान पर शासन नहीं किया है. संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 2758 का हवाला देते हुए लिन ने बताया कि उसमें कहीं भी ताइवान का नाम नहीं लिया गया. उन्होंने चीन की नीति की तुलना “सम्राट के नए कपड़े” से करते हुए कहा कि झूठ को सौ बार दोहराने से वह सच नहीं हो जाता. लिन का कहना है कि ताइवान अंतरराष्ट्रीय सहयोग, व्यावहारिक योगदान और मजबूत कूटनीतिक संबंधों के जरिए चीन के दबाव का मुकाबला कर रहा है.
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ताइवान की रणनीति (China)
ताइवान यह समझता है कि चीन का दबाव कम नहीं होगा. इस वजह से उसने दुनिया के अन्य देशों के साथ साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया है. रक्षा और कूटनीति दोनों मोर्चों पर ताइवान अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटा है. उसका मकसद है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के प्रभाव को कम किया जाए और अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखी जाए.