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भारत का ‘महा वार प्लान’! थल-जल-नभ से दुश्मनों पर करेगी एकसाथ प्रहार, जारी हुए 3 युद्धक डॉक्ट्रिन


India Joint Military Doctrines 2025: बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और आधुनिक युद्ध की जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए भारत ने बुधवार को अपनी रक्षा रणनीति को और मजबूत बनाया. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने रण संवाद मिलिट्री कॉन्क्लेव में तीन संयुक्त सैन्य सिद्धांत (Joint Doctrines) जारी किए. इनमें सबसे महत्वपूर्ण है स्पेशल फोर्सेज (SF) ऑपरेशंस का संयुक्त सिद्धांत, जो थल, जल और नभ, तीनों सेनाओं की विशेष इकाइयों को साझा सोच, प्रशिक्षण और संसाधनों से जोड़ने का प्रयास है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम भारत की सुरक्षा नीति को और धारदार बनाने के साथ-साथ थिएटराइजेशन (एकीकृत कमान व्यवस्था) की दिशा में अहम पड़ाव साबित होगा.

India Joint Military Doctrines 2025: विशेष बलों की ताकत और अभियान

भारतीय सेना की पैरा (SF), नौसेना की मार्कोस (MARCOS) और वायुसेना की गरुड़ (Garuds) ने हर बड़े आतंकी (पाकिस्तान के तरफ से) हमले पड़ोसी देशों का हमला को डटकर सामना किया है.

  • पैरा SF (सेना): 2015 में म्यांमार सीमा पर Hot Pursuit और 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक इनकी सबसे चर्चित कार्रवाइयां रहीं. इसी साल पम्पोर मुठभेड़ में भी सक्रिय रहे. हाल ही में 2025 में ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव में पीओके और घाटी में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया.
  • मार्कोस (नौसेना): 2008 मुंबई हमले में ऑपरेशन ब्लैक टॉरनेडो चलाया और ताज होटल से आतंकियों का सफाया किया. 2008–2013 के बीच कई एंटी-पाइरेसी मिशन और 2015 में यमन संकट के दौरान ऑपरेशन राहत में भागीदारी की.
  • गरुड़ कमांडो (वायुसेना): 2016 पठानकोट एयरबेस हमले में जवाबी कार्रवाई की. 2025 के ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी ड्रोन गिराए और जम्मू-कश्मीर में काउंटर-इंसर्जेंसी अभियानों में सक्रिय रहे.

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India Joint Military Doctrines 2025 in Hindi: क्यों है अहम यह सिद्धांत

अब तक इन तीनों बलों का प्रशिक्षण, उपकरण और कार्यशैली अलग-अलग रही है. नए सिद्धांत के तहत इन्हें संयुक्त प्रशिक्षण, साझा संसाधन और समान मानक संचालन प्रक्रिया (SOPs) से जोड़ा जाएगा. इससे ऑपरेशंस में समन्वय बढ़ेगा और भारत एकीकृत कमान व्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा. मौजूदा प्रशिक्षण केंद्र ज्वॉइंट सर्विस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (JSTIs) में बदले जाएंगे. हर केंद्र किसी एक विशेष कौशल का Centre of Excellence बनेगा. अतिरिक्त कमान संरचना बनाने की जरूरत नहीं होगी, मौजूदा संसाधनों का ही साझा उपयोग होगा.

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प्रशिक्षण और फोकस क्षेत्र

नई व्यवस्था में विशेष बलों को कठिन मौसम और रात में विमान या पनडुब्बी से घुसपैठ व निकासी (Insertion & Extraction) का प्रशिक्षण दिया जाएगा. साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, प्रिसीजन वेपन्स गाइडेंस (वायुसेना के विमान, थलसेना की लंबी दूरी की तोपें और नौसेना की गनफायर सपोर्ट) पर विशेष ध्यान होगा. संयुक्त ऑपरेशंस का नियंत्रण IDS या आने वाले समय की एकीकृत संरचनाओं से होगा.

दूसरा और तीसरा संयुक्त सिद्धांत

पहले सिद्धांत के अलावा, दो और अहम डॉक्ट्रिन जारी किए गए हैं—

एयरबोर्न और हेलिबोर्न ऑपरेशंस: यह सुनिश्चित करेगा कि भारत की एयरबोर्न व हेलिबोर्न फोर्सेज हर परिस्थिति शांति मिशन से लेकर पूर्ण युद्ध तक तेज और निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम रहें. सफलता उन्नत तकनीक, गहन प्रशिक्षण और संयुक्त सहयोग पर निर्भर होगी.

मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस: इसमें सेना, नौसेना और वायुसेना को थल, जल, नभ के साथ-साथ अंतरिक्ष, साइबर और संज्ञानात्मक (Cognitive) डोमेन में भी एक साथ लड़ने का ढांचा दिया गया है. इससे मैदान में सैनिकों की ताकत और ऑपरेशन सेंटर में कमांडरों की निर्णय क्षमता बढ़ेगी.

जनरल चौहान ने कहा कि यह डॉक्ट्रिन विशेष बलों के एकीकृत दर्शन को परिभाषित करता है. यह संयुक्त योजना, कार्यान्वयन और क्षमता निर्माण की आधारभूत गाइडलाइन है. उनका मानना है कि आने वाले दशक में नई तकनीकें और हथियार युद्धक्षेत्र की प्रकृति को पूरी तरह बदल देंगे.