Asia Cup Hockey 2025: भारतीय हॉकी एक शानदार विरासत का प्रतीक है. 8 ओलंपिक गोल्ड, विश्व कप में गोल्ड और तीन एशिया कप खिताब (2003, 2007, 2017) के साथ भारत ने विश्व हॉकी को नयी पहचान दी है. ध्यानचंद की जादुई स्टिक-वर्क से लेकर आधुनिक दिग्गजों तक, यह खेल भारत में गौरव, संघर्ष और पुनर्जनन की कहानी कहता रहा है. अब यही विरासत बिहार की धरती पर परखी जायेगी, जब राजगीर का स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी स्टेडियम पहली बार पुरुष एशिया कप की मेजबानी करेगा. भारत की 18 सदस्यीय टीम अनुभव और युवा जोश का अनोखा मिश्रण है. कप्तान हरमनप्रीत सिंह अपनी सटीक ड्रैग-फ्लिक और रक्षात्मक मजबूती से टीम का नेतृत्व करेंगे. चोट से उबरने के बाद उनकी पेनल्टी कॉर्नर में सफलता भारत की सबसे बड़ी ताकत होगी. Asia Cup Hockey 2025 Team India ready to win title captain Harmanpreet told this
मिडफिल्ड में मनप्रीत संभालेंगे मोर्चा
मिडफील्ड में मनप्रीत सिंह और विवेक सागर प्रसाद रक्षा और आक्रमण के बीच सेतु का काम करेंगे, जबकि फॉरवर्ड लाइन में मनदीप सिंह, अभिषेक, शिलानंद लाकड़ा, सुखजीत और दिलप्रीत सिंह आक्रमण को धार देंगे. गोलकीपिंग की जिम्मेदारी कृष्णन पाठक और सूरज करकेरा पर होगी, जिनमें से पाठक से उम्मीद है कि वे पीआर श्रीजेश की तरह निर्णायक पलों में दीवार बनकर खड़े होंगे. डिफेंस में अमित रोहिदास अपने मजबूत पेनल्टी कॉर्नर डिफेंस के लिए जाने जाते हैं, जबकि जर्मनप्रीत सिंह का जुझारू खेल टीम को अतिरिक्त मजबूती देता है.
प्रो लीग 2024-25 में लड़खड़ाया था भारत
हाल के वर्षों में भारत का प्रदर्शन मिश्रित रहा है. तोक्यो (2020) और पेरिस (2024) ओलिंपिक में कांस्य पदक, एशियाई खेल 2023 में स्वर्ण और एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 2023 में खिताब जीतने के बावजूद एफआइएच प्रो लीग 2024-25 में भारत लड़खड़ा गया. यूरोप दौरे पर खेले गये आठ मैचों में केवल एक जीत और सात हार ने टीम की कमजोरियों को उजागर किया. ढीली क्लियरेंस, गलत पोजिशनिंग और आखिरी क्वार्टर में गोल खाने की प्रवृत्ति चिंता का कारण बनी. इन कमियों को दूर करने के लिए टीम ने एसएआइ बेंगलुरु में चार हफ्ते का विशेष कैंप किया और फिर पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में तैयारी दौरा भी आयोजित किया, जहां फिटनेस, तेज पासिंग और पेनल्टी कॉर्नर बचाव पर विशेष मेहनत की गयी.
हरमनप्रीत को टीम पर पूरा भरोसा
कप्तान हरमनप्रीत सिंह का मानना है कि टीम की तैयारी अब बेहतर स्तर पर है. उनके अनुसार, हमारी तैयारी शानदार रही है. पिछले डेढ़ महीने से हम कैंप में थे और हमारा टूर भी सफल रहा. हॉकी में दोनों ‘डी’ (डिफेंस और अटैक) महत्वपूर्ण हैं, और हमें हर मौके का पूरा फायदा उठाना होगा. वास्तव में, कोच फुल्टन की रणनीति भी परंपरा और आधुनिकता का मिश्रण है, जिसमें तेज पासिंग, आक्रामक हाइ-प्रेस और काउंटर-अटैक मुख्य आधार हैं. हरमनप्रीत की ड्रैग-फ्लिक टीम की धुरी है, वहीं, रोहिदास और जर्मनप्रीत डिफेंस में स्थिरता देते हैं. लगातार पेनल्टी कॉर्नर वेरिएशन का अभ्यास किया जा रहा है ताकि टीम केवल एकतरफा रणनीति पर निर्भर न रहे.
एशिया में हमेशा मजबूत रहा है भारत
एशिया में भारत हमेशा से मजबूत रहा है. 2023 एशियाई खेल और 2024 एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में 14 मैचों में 94 गोल इसके सबूत हैं. हालांकि, 2022 एशिया कप का कांस्य पदक यह भी याद दिलाता है कि लापरवाही महंगी पड़ सकती है. इस बार पाकिस्तान सुरक्षा कारणों से टूर्नामेंट में शामिल नहीं हो रहा है और उसकी जगह बांग्लादेश को बुलाया गया है. चिरप्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान का न होना कुछ निराशा जरूर देता है, लेकिन टूर्नामेंट की प्रतिष्ठा और प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी. भारत 29 अगस्त को चीन के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगा.
हालिया नाकामियों को भुलाने का है मौका
भारत के सामने यह टूर्नामेंट सिर्फ चौथा एशिया कप खिताब जीतने का मौका नहीं है, बल्कि हालिया नाकामियों को भुलाने और 2026 विश्व कप में क्वालीफाइ करने का सुनहरा अवसर भी है. घरेलू दर्शकों का समर्थन, फुल्टन की रणनीति, हरमनप्रीत की पेनल्टी कॉर्नर में सफलता, रोहिदास और जर्मनप्रीत की रक्षात्मक मजबूती और गोलपोस्ट पर कृष्णन पाठक से श्रीजेश जैसी उम्मीद भारतीय टीम को मजबूत दावेदार बनाती है. हॉकी में पेनल्टी कॉर्नर सिर्फ स्कोर करने का नहीं, बचाने का भी खेल है. यदि मिले मौके को गोल में बदलने और मैच दर मैच की रणनीति पर अमल किया गया तो निश्चित रूप से राजगीर, भारतीय महिला हॉकी के बाद पुरुष टीम की स्वर्णिम जीत का भी गवाह बनेगा.
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