जमीन खरीदने से पहले किन बातों का रखें ध्यान? प्रभात खबर ऑनलाइन लीगल काउंसलिंग में अधिवक्ता ने दी ये सलाह
Prabhat Khabar Online Legal Counseling: बोकारो-गैरमजरूआ जमीन या वनभूमि पर कब्जा करना गैरकानूनी है. यदि आपने इन जमीनों का अतिक्रमण कर रखा है, तो आपको सूचना देकर कभी भी आप पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. अच्छा होगा कि आप जमीन लेने से पहले या किसी भी जमीन को दखल करने से पहले हर पहलू की जानकारी ले लें. किसी भी अपरिचित से जमीन लेने की स्थिति में सीओ कार्यालय से पूरी छानबीन करें. यह आपके हक के लिए अच्छा होगा. कानूनी परेशानी से बचेंगे. यह सलाह बोकारो के वरीय अधिवक्ता सह बोकारो जिला अधिवक्ता संघ के संयुक्त सचिव (पुस्तकालय) अतुल कुमार रवानी ने रविवार को ‘प्रभात खबर’ की ऑनलाइन लीगल काउंसलिंग में पाठकों के सवालों पर कानूनी सलाह देते हुए कहीं. जमीन विवाद, मारपीट, घरेलू हिंसा सहित अन्य छोटी-छोटी बातों पर तुरंत कोर्ट का रास्ता अख्तियार नहीं करना चाहिए. ऐसे मामलों को पहले सामाजिक स्तर पर निपटाने का पूरा-पूरा प्रयास करना चाहिए. कई लोग छोटे-छोटे मामले को लेकर कोर्ट जाते हैं. इसमें वर्षों लग जाता है. कोर्ट पर भी अतिरिक्त बोझ बढ़ता है.
पत्नी बार-बार चली जाती है मायके, क्या करें?
धनबाद से अमर कुमार का सवाल : मेरी पत्नी बार-बार मायके चली जाती है. ऐसे में माता-पिता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. साथ ही मुझे भी दिक्कत हो रही है. क्या कर सकता हूं.
अधिवक्ता की सलाह : हो सकता है कि ससुराल में कोई परेशानी हो, जो आपसे शेयर करने में दिक्कत हो रही है. सामाजिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए बैठ कर मामला सुलझाने का प्रयास करें. मामला नहीं सुलझता है, तो फिर न्यायालय की शरण में जायें. ध्यान रखें कि हर छोटी-छोटी बात के लिए न्यायालय का दरवाजा नहीं खटखटाना चाहिए.
गिरिडीह से विजय कुमार का सवाल : घर में जमीन का बंटवारा करना चाहता हूं. आपसी बंटवारा कागजी सही होगा या आपसी सलाह से हो जायेगा.
अधिवक्ता की सलाह : आपसी सलाह के बाद भी कोर्ट से कागजात जरूर बनवायें. कागजी कार्रवाई भविष्य के लिए जरूरी है. आनेवाली पीढ़ी को जमीन संबंधी समस्याओं से बचाव करेगा.
धनबाद से विनित कुमार का सवाल : जमीन विवाद का मामला एसडीएम कोर्ट में चल रहा था. मामले में मुझे न्याय मिल गया. अब विरोधी पक्ष के लोग दोबारा मामला कोर्ट में ले जा रहे हैं. ऐसे में मेरे लिए क्या सही होगा.
अधिवक्ता की सलाह : कोई भी व्यक्ति न्यायालय जाने के लिए स्वतंत्र है. आपके मामले में यदि आपके हक में फैसला आया है. विरोधी पार्टी पुन: कोर्ट में चुनौती देना चाहता है, तो कोई रोक नहीं सकता है. आप पुन: कागजात को प्रस्तुत करें. सबकुछ सही है, तो जीत आपकी होगी. परेशान होने की जरूरत नहीं है.
संजय यादव ने पूछा ये सवाल
धनबाद से संजय यादव का सवाल : मैंने एक व्यक्ति को एक लाख रुपया दिया था. पैसा मुझे चेक के माध्यम से वापस कर रहा है. चेक बैंक में ले जाने पर बाउंस कर गया. अब क्या कर सकता हूं.
अधिवक्ता की सलाह : पहले आपसी समन्वय बनाकर हल निकालने का प्रयास करें. ऐसा नहीं होने पर न्यायालय की शरण में जायें. आपका पैसा नश्चित रूप से आपको मिलेगा.
बोकारो से बबन यादव का सवाल : मेरे फोन-पे से अचानक रुपये गायब हो रहे हैं. ऐसे में क्या कर सकता हूं.
अधिवक्ता की सलाह : बोकारो के सेक्टर वन में साइबर थाना खुला है. वहां जाकर अपनी समस्या आवेदन के माध्यम से विस्तार से रखें. पुलिस अधिकारी के अनुसंधान के बाद ही न्याय मिलेगा. साथ ही फोन-पे को चेक करें. हो सके, तो पुन: मोबाइल को फारमेट कर इंस्टाल करें.
गोमिया से सरविंद कुमार का सवाल : क्या कोई पुलिस अधिकारी बिना कारण से किसी को गाली-गलौज कर सकता है. ऐसा किया जा रहा है, तो फिर क्या करना होगा.
अधिवक्ता की सलाह : किसी को राइट नहीं है कि किसी भी व्यक्ति के साथ गाली-गलौज करें. पुलिस अधिकारी को अपने दायरे में रहना होगा. परेशानी होने पर वरीय पुलिस अधिकारी से शिकायत करें. सुनवाई नहीं होने पर कोर्ट का सहारा लें.
बोकारो से रंजीत कुमार का सवाल : एक खतियान में छोटे बेटे का नाम है. जबकि बड़े बेटे के पुत्र ने उस जमीन को बेच दिया. ऐसे में क्या उस जमीन को हासिल किया जा सकता है.
अधिवक्ता की सलाह : जमीन जिसके नाम का है. उस जमीन को वही व्यक्ति बेच सकता है. दूसरे के बेचने से कोई हक नहीं है. जिसके नाम से जमीन है. कोर्ट में आवेदन दे. मामले उसके पक्ष में जायेगा.
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