Prabhat Khabar Exclusive, देवेश कुमार, मुजफ्फरपुर: बिहार में अब जाति आधारित गणना की तर्ज पर जल निकायों की डिजिटल गणना की जायेगी. इसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मौजूद जल संसाधनों की सही तस्वीर सामने लाना है. राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर यह पता लगाएंगे कि बिहार में तेजी से गिरते भू-जल स्तर और नहरों के सूखने के वास्तविक कारण क्या हैं और महत्वपूर्ण जल स्रोत क्यों अपनी पहचान खो रहे हैं.
पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी
योजना एवं विकास विभाग (अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय) ने इस दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया है. गणना आयुक्त सह प्रधान सचिव के सेंथिल कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिये हैं. यह डिजिटल गणना केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की निगरानी में होगी और इस पर आने वाला पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी.
2017 के बाद पहली बार 100 प्रतिशत डिजिटल मोड में होगी गणना
हालांकि, 2017-18 में पहली बार जल निकायों की डिजिटल गणना की गयी थी, लेकिन उस समय केवल फोटो ही ली गयी थी. इस बार पूरी गणना डिजिटल माध्यम से होगी, जिससे जल संसाधनों की वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा. पहले जल संसाधनों की गणना ऑफलाइन मोड में कागज और पेन के माध्यम से होती थी, लेकिन अब हर जल संसाधन का पूरा डेटा डिजिटल मोड में एकत्र किया जायेगा.
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सिंचाई योजनाओं का होगा मजबूतीकरण, जल प्रबंधन में मिलेगी मदद
बिहार के योजना एवं विकास विभाग ने राज्य की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में इस गणना कार्य को एक महत्वपूर्ण कदम बताया है. जारी पत्र के अनुसार, राज्य में लघु सिंचाई योजनाओं का युक्तिकरण किया जायेगा. इसके साथ ही, एक और ऐतिहासिक पहल करते हुए, राज्य में पहली बार झरनों की भी गणना की जायेगी. यह महत्वपूर्ण कार्य वित्तीय वर्ष 2023-24 के अंतर्गत वृहद एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाएं (एमएमआईपी), एवं लघु सिंचाई (एमआई) योजनाएं और झरना क्षेत्र प्रबंधन एवं विकास कार्यक्रम (एसएमडीपी) के तहत किया जा रहा है.
इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य में मौजूद लघु सिंचाई योजनाओं और झरनों का एक विस्तृत और अद्यतन डेटाबेस तैयार करना है. इससे आने वाले दिनों में सिंचाई योजनाओं की बेहतर योजना बनाने, उनकी निगरानी करने और उनका उचित प्रबंधन करने में मदद मिलेगी. इसी प्रकार, झरनों की गणना से उनके संरक्षण और विकास के लिए प्रभावी रणनीतियां बनाने में सहायता मिलेगी, खासकर जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के दृष्टिकोण से यह अत्यंत महत्वपूर्ण है.
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गणना का उद्देश्य
जल संसाधन जनगणना का मुख्य उद्देश्य सिंचाई क्षेत्र में जल उपयोग दक्षता, जल बजट आदि सहित प्रभावी योजना और नीति निर्माण के लिए एक व्यापक और विश्वसनीय डेटाबेस का निर्माण करना है. डेटा के संग्रह और सत्यापन के लिए डिजिटल एप्लिकेशन जनगणना के संचालन के लिए आवश्यक समय को कम करते हुए डेटा की सटीकता को काफी बढ़ाता है.