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मधुबनी में कोर्ट के फैसले पर रो पड़े पति-सास और भैंसूर, छह लोगों को मिला सात वर्ष का कारावास



Bihar News: मधुबनी नगर थाना क्षेत्र में करीब चार वर्ष पूर्व दहेज के लिए ज्योति कुमारी की हुई हत्या मामले की प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी की न्यायालय में सजा के बिंदु पर शनिवार को सुनवाई हुई. न्यायालय ने दोनों पक्ष की बहस सुनने के बाद आरोपी नगर थाना क्षेत्र के सुरतगंज निवासी पति विश्वनाथ महतो, सास कुशेश्वरी देवी, गोतनी गीता देवी, भैंसुर विनय महतो, विट्टू कुमार उर्फ रवि कुमार व सनी कुमार महतो को दफा 304 बी भादवि में सात वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनायी. मामले में बहस करते हुए लोक अभियोजक मनोज तिवारी ने आरोपी को न्यायालय से अधिक से अधिक सजा देने की मांग की थी. वहीं, बचाव पक्ष की ओर से वरीय अधिवक्ता दीनानाथ यादव व शिवकुमार ठाकुर ने बहस करते हुए कम से कम सजा देने की मांग की थी.

क्या है मामला

लोक अभियोजक के अनुसार घटना 3 फरवरी 2021 की है. ज्योति देवी की शादी 28 अप्रैल 2019 को आरोपी विश्वनाथ महतो के साथ हुई थी. विवाह के कुछ दिनों के बाद आरोपी विश्वनाथ महतो एवं उनके परिजनों ने ज्योति देवी से 5 लाख रुपये दहेज लाने की मांग करने लगे. रुपये नहीं देने पर सभी आरोपी ज्योति देवी को प्रताड़ित करने लगे. 2 फरवरी 2021 की शाम ज्योति देवी ने अपने पिता को सूचना दी कि दहेज के लिए मारपीट की जा रही है. वहीं, 3 फरवरी 2021 को सूचक दरभंगा जिला के चूनाभट्टी निवासी राजेश महतो को सूचना मिली कि ज्योति कुमारी की मौत हो गयी है. मामले में मृतिका के पिता राजेश महतो ने आरोपियों पर दहेज हत्या का आरोप लगा नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी.

मामले में एक आरोपी है फरार

इस मामले में सात अभियुक्तों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज हुई थी. लेकिन सिर्फ छह अभियुक्तों के न्यायालय में उपस्थित होने के कारण उनके खिलाफ विचारण हुआ. वहीं इस कांड के एक अभियुक्त बब्लू कुमार फरार रहने के कारण उस पर विचारण नहीं हो सका है. इसके लिए न्यायालय में अब फरार अभियुक्त के लिए अलग से विचारण होगा. न्यायालय ने पहले ही विचारण के रिकॉर्ड पृथक कर फरार अभियुक्त बब्लू कुमार के विरूद्ध गैरजमानतीय वारंट जारी कर दिया है.

परिजन को मिलेगा मुआवजा

अभियोजन के अनुसार मृतिका के परिजन को मुआवजे की राशि भी दी जायेगी. इसके लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार को आदेश दिया है, हालांकि न्यायालय ने मुआवजे की राशि तय करने की जिम्मेवारी प्राधिकार के पर छोड़ दिया है.

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