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ट्रंप के टैरिफ वॉर पर क्या कहता है Grok AI, भारत को दिया ये शानदार सुझाव



Reciprocal Tariffs: डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बढ़ाने दुनिया भर में तहलका मच गया है. Grok AI ने इस संकट पर कहा कि ट्रंप की दादागिरी पर भारत को समझदारी और ताकत दोनों दिखानी चाहिए. ग्रुक के अनुसार भारत को जवाबी टैरिफ चाल चलनी चाहिए. अमेरिकी उत्पाद, जैसे Harley-Davidson बाइक्स, व्हिस्की, या टेक प्रोडक्ट्स पर भारत टैरिफ बढ़ा सकता है. 2018 में भी भारत ने ऐसा ही किया था. ऐसा करने से ट्रंप को मैसेज जाएगा कि हम भी कम नहीं हैं.

अमेरिका पर निर्भरता कम करना चाहिए

ग्रुक ने एक अच्छा सुझाव दिया है कि भारत को अमेरिका पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहिए. यूरोप, जापान और एशियन देशों के साथ अपना ट्रेड बढ़ाना चाहिए.

भारत को मेक इन इंडिया पर और जोर देने की जरूरत

डोनाल्ड ट्रंप को भारत तगड़ा झटका दे सकता है. टैरिफ वॉर के जवाब में भारत को घरेलू उत्पाद पर अधिक ध्यान देना चाहिए. ट्रंप का मकसद है टैरिफ वॉर के जरिए अमेरिकी इंडस्ट्री को बढ़ावा देना. इसके जवाब में भारत को मेक इन इंडिया पर और जोर देना चाहिए. अमेरिकी सामना के दम बढ़ने पर घरेलू उत्पाद तैयार कर उसकी भरपाई की जा सकती है.

ट्रंप के टैरिफा का असर भारत के इन खनिज पदार्थ पर नहीं पड़ेगा असर

अमेरिका ने भारत से आयातित सभी वस्तुओं पर 27 प्रतिशत का भारी शुल्क लगा दिया है, जिसमें फार्मास्युटिकल्स, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और कुछ खनिज पदार्थ शामिल नहीं हैं. ये उत्पाद अमेरिका में उपलब्ध नहीं हैं. अमेरिका को झींगा, कालीन, चिकित्सा उपकरण और सोने के आभूषण जैसे उत्पादों का निर्यात प्रभावित होगा. दूसरी ओर, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा और फार्मा के निर्यात को उसके प्रतिस्पर्धी देशों पर बढ़त मिलेगी.

ट्रंप ने 10 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक बढ़ाया टैरिफ

डोनाल्ड ट्रंप ने सभी व्यापारिक साझेदारों से आयात पर 10 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया है. भारत पर 10 प्रतिशत का आधारभूत शुल्क पांच अप्रैल से और अतिरिक्त 27 प्रतिशत शुल्क नौ अप्रैल से प्रभावी होगा. इस कदम से अमेरिका को भारत की कुछ वस्तुओं के निर्यात पर असर पड़ सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में बेहतर स्थिति में है. इनमें बांग्लादेश (37 प्रतिशत), चीन (54 प्रतिशत), वियतनाम (46 प्रतिशत) और थाइलैंड (36 प्रतिशत) शामिल हैं, जिन्हें बढ़े हुए शुल्कों का सामना करना पड़ रहा है.