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कर्म करो, हिसाब हमारे कर्म का होगा, धर्म का नहीं- गीता का ज्ञान



Bhagavad Gita Quotes : भगवद गीता हिंदू धर्म का एक पवित्र ग्रंथ है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को जीवन के गहरे आध्यात्मिक ज्ञान से अवगत कराया. यह ग्रंथ हमें सिखाता है कि जीवन में सफलता और शांति पाने के लिए कर्म करना सबसे महत्वपूर्ण है, न कि उसके फल की चिंता करना. गीता के उद्धरण हमें सत्य, धर्म और आत्म-ज्ञान की ओर मार्गदर्शन करते हैं.bआइए, जानते हैं भगवद गीता के कुछ प्रेरणादायक उद्धरण जो जीवन को नई दिशा देते हैं:-

  1. “कर्म करो, फल की चिंता मत करो”

भगवान कृष्ण ने कहा कि हमें अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए, न कि उनके फल पर.

  1. “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्”

जब जब धर्म का ह्रास होता है, तब तब भगवान अवतार लेते हैं.

  1. “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”

तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल पर नहीं.

  1. “योगस्थः कुरु कर्माणि संगं त्यक्त्वा धनञ्जय”

योग में स्थिर होकर, आसक्ति त्याग कर कर्म करो.

  1. “माया हि परिभूतं हि सदा धर्मे स्थितं ययाः”

जो धर्म में स्थिर रहते हैं, वे ही सच्चे योगी हैं.

  1. “न हि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः”

शरीर के साथ रहकर कर्मों से पूरी तरह बच पाना असंभव है.

  1. “तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर”

इसलिए, बिना आसक्ति के अपने कर्मों को लगातार करो.

  1. “विद्या विनय संपन्ने ब्राह्मणे गव्य हस्तिनी”

सच्ची विद्या वही है जो विनम्रता और ज्ञान के साथ जुड़ी हो.

  1. “जो लोग निराश्रित हैं, वे अपने कर्मों के फल की ही चिंता करते हैं”

जो लोग भौतिक लाभ में ही रुचि रखते हैं, वे ही दुखी होते हैं.

  1. “शरीरवाङ्मनोभिर्यत्कर्म प्रारभते नरः”

मन, वाणी और शरीर के द्वारा जो भी कर्म किया जाता है, वही हमारा भाग्य तय करता है.

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भगवद गीता का यह ज्ञान हमें सिखाता है कि हम अपने कर्मों पर ध्यान केंद्रित करें और फल की चिंता न करें.