Bhagavad Gita Updesh : भगवद गीता हिंदू धर्म का एक पावन ग्रंथ है, जो जीवन के गहरे सिद्धांतों और आत्मज्ञान का मार्गदर्शन करता है. इसमें भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को धर्म, कर्म, भक्ति और ज्ञान के अद्भुत उपदेश दिए हैं. यह ग्रंथ हमें सच्चे मार्ग पर चलने, आत्म-संतुलन और जीवन के उद्देश्य को समझने में मदद करता है. इसके उद्धरण जीवन के हर पहलू में प्रेरणा और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं:-
- “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”
तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फलों में नहीं.
- “योगः कर्मसु कौशलम्”
योग वही है जो कर्म में कुशलता और निपुणता लाता है.
- “धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे युयुत्सु बहुर्विदः”
धर्म के क्षेत्र में ही सच्चे योद्धा अपने कर्तव्य का पालन करते हैं.
- “संगत्वं यत्र कर्तव्यं तत्र न हि फलप्रदः”
जहां कर्तव्य में संलग्नता होती है, वहां ही फल की चिंता नहीं करनी चाहिए.
- “अहिंसा परमो धर्मः”
अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है.
- “जैसे बीज बोएंगे, वैसे ही फल पाएंगे”
आपके कार्य ही आपके भविष्य का निर्धारण करते हैं.
- “कर्म करो, पर उसका फल मत लो”
निस्वार्थ भाव से कर्म करो, फल की अपेक्षा मत रखो.
- “मनुष्य को अपने मन को नियंत्रित करना ही सबसे बड़ा योग है”
आत्मनियंत्रण ही सच्चा योग है.
- “जो स्वयं को जानता है, वही वास्तव में बुद्धिमान होता है”
आत्मज्ञान ही सच्ची बुद्धिमत्ता है.
- “भक्ति से ही मोक्ष प्राप्त होता है”
सच्चे प्रेम और भक्ति से ही आत्मा को मुक्ति मिलती है.
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भगवद गीता के ये उद्धरण हमें सच्चे मार्ग पर चलने, अपने कर्तव्यों को निभाने और जीवन को पावन बनाने के लिए प्रेरित करते हैं.