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Bone Mineral Density Test: हड्डियों की कमज़ोरी का पता लगाना हो तो करवाएं ये टेस्ट

Bone Mineral Density (BMD) Test: हड्डियों और जोड़ों का दर्द (Joint pain) आज के दौर में बेहद आम बात हो गयी है. उम्र दराज लोग ही नहीं कम उम्र के युवा भी हड्डियों (Bones) के दर्द से अछूते नहीं हैं. आज के दौर की लाइफ स्टाइल और खानपान के चलते ज्यादातर लोग इससे निजात पाने के लिए डॉक्टर के पास जाने की बजाय घर पर ही तरह-तरह के ट्रीटमेंट लेते रहते हैं. जो कि आपकी सेहत (Health) के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

ऐसे में आपको इस दिक्कत से निजात पाने के लिए हड्डियों की जांच करवाने के जरूरत है. बता दें कि हड्डियों की मजबूती और दर्द की वजह का पता लगाने के लिए आप बोन मिनरल डेंसिटी (बीएमडी) टेस्ट करवा सकते हैं. आइये जानते हैं ये टेस्ट क्या है और इस टेस्ट को करवाने की जरूरत किन लोगों को होती है.

बोन मिनरल डेंसिटी (बीएमडी) टेस्ट हड्डियों की मजबूती की जांच के लिए करवाया जाता है. इस टेस्ट के जरिये ड्यूअल एनर्जी एक्स-रे एब्जॉर्पटियोमेट्री (डेक्सा) मशीन की मदद से हड्डियों के घनत्व यानी डेंसिटी को परखा जाता है. साथ ही हड्डियों की कमजोरी की वजह का पता लगाया जाता है. इस टेस्ट के जरिये हड्डियों में मौजूद कैल्शियम और अन्य मिनरल्स की जानकारी मिलती है. इस टेस्ट के जरिये ऑस्टियोपीनिया व ऑस्टियोपोरोसिस जैसी हड्डियों को कमजोर करने वाली बीमारी का पता भी लगाया जा सकता है.

बीएमडी टेस्ट को करवाने की जरूरत खासतौर पर पचास वर्ष से ज्यादा उम्र वाले लोगों, मेनोपॉज होने के बाद महिलाओं को, कम उम्र में यूट्रेस निकलवा चुकी महिलाओं को है. लेकिन जिन लोगों की हड्डियों में अक्सर दर्द रहता है. जल्दी थकान और कमजोरी महसूस होने लगती है, वो लोग भी इस टेस्ट को करवा सकते हैं. इसके साथ ही इस टेस्ट को वो लोग भी करवा सकते हैं. जो लंबे समय से स्टेरॉयड या एंटीसाइकेट्रिक दवा का सेवन करते आ रहे हैं. डॉक्टर इस टेस्ट को करवाने की सलाह मेटाबॉलिक बोन डिजीज के रोगी के लिए भी देते हैं.

बीएमडी टेस्ट एक दर्द रहित टेस्ट है जिसमें लगभग बीस-पच्चीस मिनट का समय लगता है. इस टेस्ट को करवाने के लिए किसी भी तरह के परहेज की जरूरत नहीं होती है. लेकिन इस टेस्ट को डॉक्टर की सलाह पर ही करवाना उचित होता है. साथ ही गर्भवती महिलाओं को अपनी प्रेग्नेंसी की जानकारी भी जांच से पहले बतानी होती है. जिससे डेक्सा मशीन से निकलने वाले रेडिएशन के इफेक्ट्स से उनको बचाया जा सके.

 

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