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मोदी सरकार से 370 की बहाली की मांग करना मूर्खतापूर्ण है, मिशन में तो BJP ने 70 साल लगाए: उमर अब्दुल्ला

इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में, उमर अब्दुल्ला ने कहा, “भाजपा को अनुच्छेद 370 के अपने राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने में 70 साल लग गए। हमारा संघर्ष तो अभी शुरू हुआ है। हम जम्मू कश्मीर की जनता और लोगों को यह कहकर मूर्ख नहीं बनाना चाहते कि हम पिछली बैठक और वार्ताओं को करके 370 वापस लाएंगे। मोदी सरकार से यह उम्मीद करना मूर्खता होगी कि 370 वापस आ जाएगा। वर्तमान सरकार द्वारा इसे बहाल करने के कोई संकेत नहीं मिले हैं।”
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष ने कहा उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से अनुच्छेद 370 की पुन बहाली की मांग करना अपने आप में मूर्खतापूर्ण होगा। बीजेपी ने तो अपने इस मिशन को पूरा करने में 70 साल लगा दिए हैं। उनसे किसी भी तरह की उम्मीद करना मूर्खता है। उमर अब्दुल्ला ने ये बयान जम्मू कश्मीर के 14 वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक में हिस्सा लेने के बाद दिया है। पीएम मोदी द्वारा 24 जून को बुलाई गई बैठक लगभग 3 घंटे चली। इस बैठक में उमर अब्दुल्ला ने कुछ भी नहीं कहा था। उमर अब्दुल्ला के अलावा निर्मल सिंह, तारा चंद, गुलाम ए मीर और रविंदर रैना ने भी बैठक में चुप रहने बेहतर समझा था।

उमर अब्दुल्ला ने पीएम नरेंद्र मोदी की इस बैठक को एक शुरुआती कदम कहा है। क्या नेशनल कांफ्रेंस ने अनुच्छेद 370 की बहाली की अपनी मांग को छोड़ दिया है? इस सवाल के जवाब में उमर अब्दुल्ला ने कहा, ”पीएम मोदी के साथ हुई गुरुवार की उस बैठक में अनुच्छेद 370 का मुद्दा उठाने का कोई मतलब यह नहीं था। लेकिन मैं ये साफ-साफ बता देना चाहता हूं कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अनुच्छेद 370 की बहाली का मुद्दा नहीं छोड़ा है। हम इस लड़ाई को कानूनी, शांतिपूर्ण और संवैधानिक रूप से लड़ेंगे। हम इस मामले में चतुराई से लड़ रहे हैं… । सुप्रीम कोर्ट में ये मामला चल रहा है, जहां हमें अपनी बात रखने का ज्यादा मौका मिलेगा।” इस बैठक को लेकर उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हालांकि बैठक में निष्पक्षता का ध्यान रखा था। दोनों में से किसी ने भी बातचीत के लिए कोई शर्त नहीं रखी थी। हमें अपनी कोई भी मांग बैठक में रखने की आजादी दी गई थी। हमें अपनी कोई भी मांग सरेंडर नहीं करनी पड़ी थी।

5 अगस्त 2019 के बाद केंद्र सरकार और जम्मू कश्मीर के मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के बीच संचार पूरी तरह से खत्म हो गया था, इस सवाल के जवाब में उमर अब्दुल्ला ने कहा, ” पीएम की बैठक में हिस्सा लेने के हमारे दो मूल कारण थे। एक भारत सरकार से यह समझना कि उनके मन में क्या था और आगे के रोडमैप का लेकर उनका क्या विचार है। दूसरा, हम भी अपनी बात रखना चाहते थे। नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी ने पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से वही कहा था जो हमने श्रीनगर में कहा था। यानी उन्होंने जो किया वह गलत था और आबादी का एक बड़ा हिस्सा उनके इस फैसले से नाखुश है।”

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