120 Bahadur Review: एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज की फिल्म 120 बहादुर अब सिर्फ एक युद्ध-कथा नहीं रही, बल्कि अहिर समुदाय के ऐतिहासिक सैन्य योगदान को नई पहचान देने वाली एक महत्वपूर्ण सिनेमैटिक उपलब्धि बन गई है. रिलीज के बाद से फिल्म ने दर्शकों के बीच एक नई चर्चा को जन्म दिया है. खास जाकर उन लोगों में, जिन्होंने पहले इसके चित्रण को लेकर सवाल उठाए थे.
120 bahadur मे अहीरो की वीरता दिखाई गई है
मै देख चुका हूँ, आप लोग भी देखे flop ना होने दे 🙂
हरियाणवी अहीरो की बातो मे मत आये खुद देखो 🙏 pic.twitter.com/kJgeCQTDRs
— Ministry of Ahirs 🦋 👑 (@Ahir_1622) November 22, 2025
निर्देशक रजनीश ‘रेजी’ घई ने कहानी को इस तरह गढ़ा है कि अहिर सैनिकों की बहादुरी, अनुशासन और बलिदान केवल दिखते नहीं, बल्कि महसूस होते हैं. संवाद, भाषा, बोली और सांस्कृतिक बारीकियों पर की गई रिसर्च स्पष्ट झलकती है और यही कारण है कि आलोचक और दर्शक दोनों इसकी सच्चाई और संवेदनशीलता की तारीफ कर रहे हैं.
शुरुआत में जहां विरोध के सुर उठे थे कि क्या फिल्म अहिर समुदाय के योगदान को सही तरह दिखा पाएगी, वहीं अब स्क्रीन पर उभरती कहानी ने उन संदेहों को काफी हद तक दूर कर दिया है. कई लोगों का मानना है कि जिन्होंने फिल्म पर आपत्ति जताई थी, उन्हें अब इसे खुले मन से दोबारा देखना चाहिए, क्योंकि यह अहिर पहचान, कर्तव्यबोध और अटूट साहस को पूरे सम्मान के साथ पेश करती है.
फिल्म का केंद्र है 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान लड़ी गई ऐतिहासिक रेजांग ला की लड़ाई, जिसमें भारतीय सेना की 13 कुमाऊं रेजिमेंट के 120 वीर जवानों ने अद्भुत पराक्रम दिखाया था. मेजर शैतान सिंह भाटी (पीवीसी) की भूमिका में नजर आ रहे फरहान अख्तर ने उस अडिग नेतृत्व को जीवंत कर दिया है, जिसने इस युद्ध को भारतीय इतिहास की सबसे गौरवपूर्ण लड़ाइयों में शामिल किया.
फिल्म की आत्मा एक दमदार पंक्ति में समायी है, “हम पीछे नहीं हटेंगे.” यह सिर्फ एक डायलॉग नहीं, बल्कि उन 120 बहादुरों की विचारधारा और अटूट देशभक्ति का प्रतीक है. रितेश सिधवानी, फरहान अख्तर और अमित चंद्रा द्वारा निर्मित यह फिल्म 21 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और दर्शकों के दिलों में देशभक्ति की नई लहर पैदा कर रही है.
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