फिल्म – परम सुंदरी
निर्माता -दिनेश विजन
निर्देशक – तुषार जलोटा
कलाकार – सिद्धार्थ मल्होत्रा, जाह्नवी कपूर,संजय कपूर, रेंजी पन्निकर,सिद्धार्थ शंकर इनायत वर्मा और अन्य
प्लेटफार्म -सिनेमाघर
रेटिंग – दो
param sundari review :सैयारा की बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता के बाद उम्मीद थी कि लार्जर देन लाइफ नहीं बल्कि लव स्टोरी फिल्मों का जादू अब लोगों के सर चढ़कर बोलने वाला है. आज रिलीज हुई परम सुंदरी को इसकी अगली कड़ी बताई जा रही थी.मौजूदा दौर के हिट मेकर दिनेश विजन का नाम इस रोमांटिक कॉमेडी फिल्म में था. सिद्धार्थ और जाह्नवी कपूर की खूबसूरत जोड़ी भी इस फिल्म से जुड़ी थी लेकिन फिल्म से खूबसूरत कहानी नदारद थी.कहानी में नयेपन की कमी है और स्क्रीनप्ले भी कमजोर रह गया है. कहानी और स्क्रीनप्ले की वजह से यह फिल्म रोमांटिक और कॉमेडी दोनों ही मोर्चे पर एंटरटेन करने से चूक गयी है.
नार्थ बनाम साउथ वाली है प्रेम कहानी
फिल्म की कहानी परम (सिद्धार्थ मल्होत्रा )की है. जो दिल्ली के बेहद सफल बिजनेसमैन (संजय कपूर )का बेटा है ,लेकिन वह बिजनेस में लगातार नाकामयाब ही रहा है.इस बार पिता ने अल्टीमेटम दे दिया है कि वह उसके स्टार्टअप को अब तभी लांच करेंगे अगर वो साबित करेगा कि उसका आईडिया अच्छा है. परम एक सोलमेट डेटिंग एप लांच करना चाहता है. पिता के सामने अपने आईडिया को परफेक्ट बताने के लिए वह सोलमेट एप द्वारा बताई गयी अपनी जिंदगी की सोलमेट सुंदरी (जाह्नवी कपूर )से मिलने केरल पहुँच जाता है और सचमुच ही वह उससे प्यार कर बैठता है. धीरे धीरे सुंदरी को भी परम पसंद आने लगता है,. प्रेम कहानी है तो पेंच भी होगा ही . सुंदरी और परम में कल्चर डिफरेंस है.एक नार्थ से है तो दूसरा साउथ से है.इसके साथ ही सुंदरी की शादी पहले से ही तय है. परम और सुंदरी की लव स्टोरी का क्या होगा और बिजनेस आईडिया का भी.यही आगे की कहानी है.
फिल्म की खूबियां और खामियां
नार्थ बनाम साउथ की प्रेम कहानी को टू स्टेट्स, चेन्नई एक्सप्रेस जैसी कई फिल्मों में दर्शाया गया है. परम सुंदरी भी उसी जॉनर की फिल्म है लेकिन नयापन लिए नहीं है. फिल्म बताने की पूरी कोशिश करती है. प्यार सोशल मीडिया या एल्गोरिदम जैसे बातों में फिट नहीं होती है बल्कि यह आत्मा से अनुभव करने वाली चीज है, लेकिन इस फिल्म की कहानी से वही आत्मा मिसिंग है.फिल्म का फर्स्ट हाफ बहुत ज्यादा खिंच गया है.सेकेंड हाफ में फिल्म थोड़ी एंटरटेनिंग होती है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. फिल्म में अल्गोरिदम और सोशल मीडिया की बात हो रही है लेकिन साउथ इंडियन किरदार को अभी ही हिंदी को इंडी बोलते हुए ही दिखाया गया है.साउथ के लोग काले होते हैं. सांस्कृतिक टकराव को फिल्म में मज़ेदार कम घिसा पिटा सा रह गया है.फिल्म में मलयालम शब्दों का जमकर इस्तेमाल हुआ है. हिंदी भाषियों को इससे थोड़ी दिक्कत हो सकती है.कुछ जगहों पर ही सब टाइटल्स का इस्तेमाल हुआ है. फिल्म की स्क्रीनप्ले के साथ साथ इसका कॉमेडी पंच भी कमजोर रह गया है.निर्माता दिनेश विजन की फिल्मों में कॉमेडी एक मजबूत पक्ष होता आया है. इससे भी उम्मीद बंधी थी लेकिन यहां मामला कमजोर रह गया है. फिल्म के अच्छे पहलुओं में इसकी सिनेमेटोग्राफी है. केरल की खूबसूरती मोहती है. गीत संगीत अच्छा बन पड़ा है.
कमजोर कहानी ने सितारों को भी चमकने नहीं दिया
सिद्धार्थ मल्होत्रा और जाह्नवी कपूर कमजोर कहानी और स्क्रीनप्ले वाली फिल्म में अच्छे रहे हैं. स्क्रीनप्ले में इमोशन और ड्रामा की कमी है इसलिए उनका किरदार भी उभर नहीं पाया है. ऑन स्क्रीन दोनों एक दूसरे को लुक से कॉम्पलिमेंट करते हैं लेकिन लव स्टोरी फिल्मों के लिए जिस जादुई केमिस्ट्री की जरुरत होती है. वह यह जोड़ी परदे पर क्रिएट नहीं कर पायी है.बाकी के किरदारों ने अपनी अपनी भूमिका के साथ न्याय किया