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manoj kumar:सायरा बानो ने बताया साहब और मनोज जी फूडी थे.. रेसिपी भी करते थे शेयर



manoj kumar :हिंदी सिनेमा के दिग्गज सुपरस्टार मनोज कुमार अब  हमारे बीच नहीं रहे.आज सुबह 87 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया है. अभिनेत्री सायरा बानो इसे बहुत ही इमोशनल करार देती हैं. वह कहती हैं कि साहब (दिलीप कुमार )मनोज जी के आदर्श थे.वे बहुत करीबी रिश्ता शेयर करते थे, जिस वजह से हमारे परिवार भी एक दूसरे के बहुत करीब रहे हैं. उर्मिला कोरी से हुई बातचीत के प्रमुख अंश  

आखिरी मुलाकात को अरसा हो गया 

मनोज जी से आखिरी मुलाकात को काफी अरसा बीत गया है. उनकी तबीयत बीते कुछ सालों से अच्छी नहीं चल रही थी तो पहले जैसा मिलना मिलाना नहीं हो पाता था. शशि जी से कभी कभार बात हो जाती थी. हमारे डॉक्टर्स भी परिचित हैं तो उनसे भी उनकी हालचाल और उनके मेडिकल रिपोर्टस के बारे में खबरें मिल जाती थी. शशि जी और उनके बच्चों ने उनकी बहुत ही अच्छी देखभाल की. उनकी बहुत केयर की, लेकिन होनी को कोई टाल नहीं सकता था. 

मनोज जी घोड़ों से बहुत डरते थे 

मनोज जी और मैंने साथ में तीन फिल्में की है. सबसे पहली फिल्म शादी थी. वह मेरी शुरुआती फिल्मों में से एक थी.सेट पर हम दोनों एक दूसरे के साथ सहज थे लेकिन हम थोड़े शर्मीले स्वभाव से थे ,तो बहुत कम बात करते थे.मेरा कोई सोलो शॉट होता था,तो मनोज जी वहां से हट जाते थे ताकि मैं आराम से वह शॉट दे सकूं क्योंकि उस वक़्त रोमांटिक सोलो नंबर्स को करते हुए मुझे बहुत झिझक होती थी.वह बहुत ही अंडरस्टैंडिंग को एक्टर थे.फिल्म पूरब और पश्चिम में उन्होंने साहेब से परमिशन मेरे काम करने की ली थी. उन्होंने साफ कहा था कि अगर मैंने फिल्म को हां नहीं किया,तो वह फिल्म नहीं बनाएंगे. मैं बताना चाहूंगी कि उपकार के लिए भी पहली चॉइस मैं ही थी,लेकिन उस वक्त मैंने किसी और फिल्म को वो तारीखें दे दी थी.तीसरी फिल्म हमारी साथ में बलिदान थी. उस फिल्म से जुड़ा एक बहुत रोचक किस्सा है.फिल्म के सीक्वेंस में मेरे और मनोज जी के पीछे डाकू पड़े हुए हैं. हमारे हाथ बंधे हुए हैं और हम पानी पर भाग रहे हैं. शॉट ऐसा था कि डाकू घोड़े से पीछा करते हुए हमारे पीछे आएंगे और मुझ पर कोड़े बरसायेंगे,लेकिन मनोज जी का किरदार कोड़े को हवा में ही रोक लेगा और हीमैन की तरह मुझे बचाएगा लेकिन जैसे ही शॉट शुरू हुआ. मैंने पाया कि घोड़ों के डर से वह मुझे बचाने के बजाय मेरे पीछे ही छिप गए थे. हमारा हंस हंसकर बुरा हाल हो गया था.वैसे उनकी पत्नी शशि भी इस मामले में उनकी खिचाई करती थी. वह बताती थी कि हमारे घर में अगर मधुमक्खी भी आ जाती है,तो उसे मुझे ही भगाना पड़ता है. मनोज जी उसे भी देखकर चादर में छिप जाते हैं.

वेजीटेरियन थे लेकिन ऑमलेट पसंद करते थे 

यह बात सभी को पता है कि मनोज जी शाकाहारी थी. वे मांस , मछली नहीं खाते थे. वह सिर्फ अंडे खाते थे. हमारे घर पर वह जब भी आते थे.उनका पसंदीदा ऑमलेट बनाया जाता था.हमारे घर के जो कुक थे. वे कई सालों से हैं तो उन्हें हमारे खास मेहमानों की पसंद -नापसंद भी अच्छे पता है. मनोज जी घर पर आये हैं मतलब ऑमलेट की कोई अलग वैरायटी उनको खिलानी ही है. इसके अलावा वह भजिया भी खाना पसंद करते थे. हमारे घर पर उनकी सबसे फेवरेट जगह छत होती थी. छत पर  भजिया और ऑमलेट खाते हुए साहेब (दिलीप कुमार )और मनोज जी पतंगबाजी करते थे.मनोज जी और साहब दोनों को अंडे खाना पसंद था इसलिए दोनों अंडों की अलग अलग रेसिपीज भी एक दूसरे के साथ शेयर करते थे कि इस तरह से बनाया जाए तो और टेस्टी और अलग बनेगा.

मनोज जी ने हाथ जोड़ लिए थे 

साहेब ने मनोज जी के साथ क्रांति फिल्म की थी.उस फिल्म की रिलीज से पहले मनोज जी ने मेरे और मेरी सहेलियों के लिए स्पेशल स्क्रीनिंग रखी थी.जैसे ही फिल्म की स्क्रीनिंग खत्म हुई। हम मिले। मनोज जी ने मुझे कहा कि सायरा जी अभी तक आपने कुछ भी नहीं कहा। मैंने जवाब में कहा कि इस फिल्म में मैं दिलीप साहब को और देखना चाहती थी. मेरी इस बात को सुनकर मनोज जी ने हाथ जोड़कर कहा कि मैं भी चाहता था कि वह हर फ्रेम में हों,लेकिन मुझे स्क्रिप्ट को फॉलो करना पड़ा.