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चीन के अमेरिका पर तगड़े पलटवार के क्या मायने? जानें भारत पर इसका क्या असर


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चीन ने उन्हीं की भाषा में जवाब दिया है। भारत के पड़ोसी चीन ने अमेरिका पर 34% टैरिफ लगाने की घोषणा की है। चीन की तरफ से कहा गया है कि 10 अप्रैल से अमेरिका से आयात होने वाले सामान पर अतिरिक्त 34 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। बीजिंग की यह कार्रवाई डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ का जवाब है।

पहले भी दिया है जवाब

डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल से दुनिया के कई देशों पर जवाबी टैरिफ लगाया है। भारत पर जहां 26% टैरिफ लगाया गया है। वहीं, चीन पर कुल टैरिफ 54% हो गया है। यह पहले से ही माना जा रहा था कि अमेरिका के इस कदम का चीन जवाब दे सकता है, क्योंकि पहले भी उसने इसी तरह ट्रंप को जवाब दिया था। चीन के 34% टैरिफ की घोषणा से ग्लोबल ट्रेड वॉर की आशंका तेज हो गई है।

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दोनों देशों में तनाव बढ़ा

चीन और अमेरिका के बीच विवाद नया नहीं है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में यह काफी ज्यादा बढ़ गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान कहा था कि वह चीन पर 60% टैरिफ लगाएंगे और वह इसके काफी करीब पहुंच चुके हैं। पहले पहले उन्होंने चीनी आयात पर 20% टैरिफ लगाया, अब 34% की घोषणा की, इस तरह कुल टैरिफ 54% हो गया है।

दुनिया पर होगा प्रभाव

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने बताया है कि उसने 16 अमेरिकी कंपनियों को अपनी एक्सपोर्ट कंट्रोल लिस्ट में डाल दिया है। जबकि 11 अमेरिकी कंपनियों को चीन की ‘अविश्वसनीय इकाई’ सूची में शामिल किया गया गया है। ऐसे में अमेरिका की इन कंपनियों के लिए चीन तक पहुंच मुश्किल हो जाएगी। जानकार मानते हैं कि अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता तनाव पूरी ग्लोबल इकोनॉमी के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। उनका कहना है कि चीन और अमेरिका दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं, ऐसे में उनके बीच टकराव से पूरी दुनिया का प्रभावित होना लाजमी है।

अब क्या संभावना?

चीन की जवाबी कार्रवाई यूरोपीय यूनियन सहित बाकी देशों को भी अमेरिकी रेसिप्रोकल टैरिफ के खिलाफ एक्शन लेने को प्रेरित कर सकती है। अगर अन्य देश भी चीन के रास्ते पर चलते हैं तो फिर ग्लोबल ट्रेड वॉर शुरू हो जाएगी, जो वैश्विक अर्थव्यस्था के लिहाज से अच्छा नहीं होगा। चीन के टैरिफ का असर अमेरिका पर क्या असर होगा, यह दिखाई देने लगा है।। बीजिंग की जवाबी कार्रवाई के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट दिखाई दी है।

यूएस मार्केट में गिरावट

यूएस इंडेक्स डॉव जोन्स शुक्रवार को 2,231.07 अंक या 5.5% गिरकर 38,314.86 पर पहुंच गया, जो जून 2020 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले गुरुवार को इसमें 1,679 अंकों की गिरावट आई थी और यह पहली बार है कि लगातार दो दिनों में इसमें 1,500 अंकों से अधिक की गिरावट आई है। एस&पी 500 भी 5.97% की भारी गिरावट के साथ 5,074.08 पर आ गया, जो मार्च 2020 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है। नैस्डैक कम्पोजिट में भी 5.82% की बड़ी गिरावट दर्ज हुई है।

आपदा में अवसर

अमेरिकी बाजार में गिरावट भारत सहित एशियाई बाजारों में भी दबाव की वजह बन सकती है। भारत का शेयर बाजार टैरिफ की घोषणा के चलते पहले से ही दबाव में है। शुक्रवार को इसमें बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। हालांकि, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती टेंशन ने एक संभावना को भी जन्म दिया है। दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे पर लगाए गए भारी टैरिफ से उनकी अर्थव्यस्थाएं प्रभावित होंगी, ऐसे में भारत छोड़कर चीन जा रहे या अमेरिका में निवेश को बढ़ावा दे रहे विदेशी निवेशक वापसी कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो भारतीय बाजार को बूस्ट मिल सकता है।

ऐसे मिल सकता है लाभ

भारत के चीन और अमेरिका दोनों से व्यापारिक रिश्ते हैं। भारत का चीन के साथ सीमा विवाद भले है, लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के बीच अच्छा-खासा व्यापार होता है। यूएस-चीन तनाव से भारत को अपना निर्यात बढ़ाने का एक मौका मिल सकता है। अमेरिका ने चीन पर टैरिफ लगाकर चीनी सामान को महंगा किया है, जिससे यूएस में उसकी डिमांड कम हो सकती है और भारत उसके एक विकल्प के तौर पर सामने आ सकता है। इसी तरह, चीन अमेरिका से कृषि उत्पाद (जैसे सोयाबीन, मक्का) और इंडस्ट्रियल गुड्स की बड़े पैमाने पर खरीदारी करता है। चीन के जवाबी टैरिफ से ये अमेरिकी आइटम्स काफी महंगे हो जाएंगे, ऐसे में भारत अपेक्षाकृत सस्ता विकल्प पेश कर सकता है। हालांकि, यदि ग्लोबल ट्रेड वॉर शुरू होती है, तो भारत को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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Current Version

Apr 05, 2025 08:22

Edited By

Neeraj