EBM News Hindi
Leading News Portal in Hindi

कार सेफ्टी और मेंटेनेंस में हो रही है परेशानी तो आ गया गाड़ी बदलने का टाइम


हम सभी के पास अपनी पुरानी कार होती है, जो सालों से हमारे सफर की साथी रही है। लेकिन समय के साथ कार की हालत, रिपेयर खर्च, सुरक्षा फीचर्स और हमारे जीवन की जरूरतें बदल जाती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कब अपनी पुरानी कार बदलना चाहिए? तो आइए जानते हैं कि किन परिस्थितियों में नया वाहन खरीदना आपके लिए सही रहेगा।

मेंटनेंस में ज्यादा खर्च पर

अगर आपकी कार बार-बार खराब हो रही है और इंजन, ट्रांसमिशन जैसे बड़े पार्ट्स की रिपेयर में बहुत पैसा खर्च हो रहा है, तो यह संकेत है कि कार बदलने का समय आ गया है।

—विज्ञापन—

एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर रिपेयर खर्च कार की कीमत का 50% या उससे ज्यादा हो जाए, तो कार बदलना फायदेमंद हो सकता है। केवल रिपेयर ही नहीं, बल्कि ईंधन, बीमा, टैक्स और डेप्रिसिएशन (Depreciation) का भी हिसाब लगाएं। अगर कुल खर्च नए मॉडल के बराबर या उससे ज्यादा हो रहा है, तो नया वाहन खरीदना सही होगा।

ये भी पढ़ें- भारत में ये है EV कारों का ट्रेंड, सिर्फ 6 महीने में 74 हजार से ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां बिकीं

—विज्ञापन—

कार सेफ्टी में कमी होने पर

अगर आपकी कार अक्सर स्टॉल हो रही है, सही से स्टार्ट नहीं हो रही या अचानक टूट रही है, तो यह सुरक्षा और भरोसे का खतरा है। पुरानी कारों में आधुनिक सुरक्षा फीचर्स जैसे एयरबैग, ABS, लेन असिस्ट या बैकअप कैमरा नहीं होते। अगर इंजन या चेसिस में गंभीर समस्या है, या कार में जंग (rust) की वजह से छेद हो गए हैं, तो इसे चलाना जोखिम भरा हो सकता है। फ्लड डैमेज (बाढ़ से नुकसान) वाली कार भी लंबे समय तक महंगी और मुश्किल रिपेयर की वजह बन सकती है।

लाइफस्टाइल और जरूरत बदलने पर

अगर परिवार बढ़ गया है और आपको ज्यादा स्पेस या सीटिंग की जरूरत है, तो SUV या 7-सीटर कार लेना बेहतर हो सकता है। लंबी ड्राइव या ट्रैफिक में आसानी के लिए ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन जैसे फीचर जरूरी हो सकते हैं। इस तरह की बदलती जरूरतों के लिए नई गाड़ी बेहतर विकल्प होता है।

पुराने फीचर्स और लुक से बोर होने पर

अगर आपकी कार में आधुनिक टेक्नोलॉजी और सुविधाएं नहीं हैं, जैसे टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट, कनेक्टिविटी फीचर्स या ड्राइवर असिस्ट सिस्टम, तो नया मॉडल बेहतर रहेगा। इसके अलावा, कार की पुरानी हालत और दिखावट भी कभी-कभी नई कार लेने की इच्छा पैदा करती है।

कानूनी नियम

कुछ क्षेत्रों जैसे दिल्ली NCR, पेट्रोल और डीजल कारों की सड़क पर उम्र की सीमा होती है। वहीं स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता पर भी गाड़ी रिप्लेस करना निर्भर करता है। अगर आपकी कार पुरानी या बंद हो चुकी ब्रांड की है, तो पार्ट्स ढूंढना मुश्किल और महंगा हो सकता है। हालांकि पुरानी कार बदलना एक पर्सनल डिसिजन है। फिर भी इन बातों को ध्यान में रखकर विचार किया जा सकता है।