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सचिन से भी लंबा रहा है इस क्रिकेटर का इंटरनेशनल करियर, कहलाते थे काउंटी के बादशाह


Wilfred Rhodes Records: खेल चाहे कोई भी हो उसमें फिटनेस बड़ी बात होती है. क्रिकेट के खेल में भी कुछ ऐसा ही है. किसी खिलाड़ी की फिटनेस ही तय करती है कि उसका करियर कितना लंबा होगा. टीम इंडिया के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने काफी लंबे समय तक क्रिकेट खेलकर एक मिसाल पेश किया है. उनका इंटरनेशनल क्रिकेट करियर 24 साल का रहा, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इंग्लैंड का एक ऐसा भी खिलाड़ी है, जिसने 31 साल तक मैदान पर राज किया और इतने लंबे इंटरनेशल करियर वाला दुनिया का पहला क्रिकेटर है. हम बात करे हैं इंग्लैंड के पूर्व ऑलराउंडर विल्फ्रेड रोड्स की. उन्होंने 1899 में इंग्लैंड के लिए डेब्यू किया और अपना आखिरी मैच 1930 में खेला.

21 साल की उम्र में किया टेस्ट डेब्यू

21 साल की उम्र में इंटरनेशनल डेब्यू करने वाले रोड्स का काउंटी क्रिकेट में वर्चस्व था. यॉर्कशायर के लिए उन्होंने 30 की औसत से 30,000 से ज्यादा रन बनाए. इसी टीम के लिए उन्होंने गेंदबाजी करते हुए 3,608 विकेट भी चटकाए. उन्होंने यॉर्कशायर के लिए काफी लंबे समय तक खेला, इसलिए नेशनल टीम के लिए वह केवल खाली समय में ही खेलते थे. उन्होंने इंग्लैंड के लिए 58 टेस्ट खेलते हुए 30 से ज्यादा की औसत और 131 की स्ट्राइक रेट से 2,325 रन बनाए. उन्होंने गेंदबाजी करते हुए अपने देश के लिए 127 विकेट भी चटकाए. अपने पहले टेस्ट मैच में वे बल्लेबाजी क्रम में सबसे नीचे थे, और 1903/04 के सिडनी टेस्ट मैच में उन्होंने आज तक की सबसे सफल टेस्ट मैच की आखिरी विकेट की साझेदारी की. उन्होंने आरई फोस्टर के साथ मिलकर दसवें विकेट के लिए 130 रन जोड़े, जिसमें उनका योगदान नाबाद 40 रन था.

आखिरी विकेट के लिए 323 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी

इसके आठ साल बाद, मेलबर्न में वे इंग्लैंड के लिए पहले बल्लेबाजी करने उतरे और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले विकेट के लिए हॉब्स के साथ 323 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी की. उनका करियर पहले से ही एक किंवदंती बन चुका है. यह वाकई एक परीकथा जैसा लगता है. जब उन्होंने लॉर्ड्स में एमसीसी के खिलाफ मैच में यॉर्कशायर के लिए पहली बार गेंदबाजी की थी, तब उनकी उम्र 21 साल भी नहीं रही होगी. पहली पारी में उन्होंने ट्रॉट और चैटरन को आउट किया. दूसरी पारी में उन्होंने 63 रन देकर छह चटकाए, जो एक शुरुआत थी. सीजन के अंत तक उन्होंने 14.60 की औसत से 154 विकेट लेकर खुद को इंग्लैंड के सबसे महान धीमे बाएं हाथ के गेंदबाज के रूप में स्थापित कर लिया.

1919 में 1000 से ज्यादा ओवर गेंदबाजी और 164 विकेट

जिस दौरान रोड्स और हॉब्स इंग्लैंड की हर पारी की शुरुआत करते थे, उस दौरान रोड्स ज्यादा गेंदबाजी नहीं करते थे. 1911/12 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे में उन्होंने केवल 18 ओवरों का योगदान दिया था. युद्ध शुरू होने की वजह से कुछ दिन क्रिकेट रुक गया. फिर 1919 में यॉर्कशायर को फिर से रोड्स की स्पिन और फ्लाइट की जरूरत पड़ी, इसलिए उन्होंने अपनी गेंदबाजी कला को ठीक उसी तरह से अपनाया, जैसे उन्होंने वर्षों पहले इसे शुरू किया था. उन्होंने 1919 में 1,048 ओवरों में 14.42 की औसत से 164 विकेट लेकर गेंदबाजी औसत में शीर्ष स्थान हासिल किया. उस समय उनकी उम्र लगभग 42 वर्ष थी. 1902 में केनिंग्टन ओवल में जब ऑस्ट्रेलिया को हराने के लिए 15 रन चाहिए थे, तब वे इंग्लैंड के लिए आखिरी बार मैदान पर उतरे थे. रोड्स के साथ हमेशा यॉर्कशायर के आक्रमण की शुरुआत करने वाले जॉर्ज हर्स्ट दूसरे छोर पर विकेट संभाले हुए थे. इंग्लैंड वह मुकाबला एक विकेट से जीत गया था.

49 साल की उम्र तक खेलते रहे रोड्स

49 साल के रोड्स को एक बार फिर इंग्लैंड इलेवन में वापस बुलाया गया. इंग्लैंड के लिए अपने इस आखिरी मैच में, रोड्स ने 79 रन देकर दोनों पारियों में 6 विकेट चटकाए. उस समय तक शायद उन्होंने अपनी पुरानी तेजी और महत्वपूर्ण उंगलियों वाली स्पिन काफी हद तक खो दी थी. वह एक महान खिलाड़ी थे, क्रिकेट के इतिहास के महानतम खिलाड़ियों में से एक थे. कुछ आंकड़े बताते हैं कि काउंटी के 37 सीजन में रोड्स ने लगभग 40,000 रन बनाए और 4,184 विकेट लिए. आज भी काउंटी उनको काफी सम्मान से याद करता है. 29 अक्टूबर 1877 को जन्मे इस महान खिलाड़ी का 8 जुलाई 1973 में 95 साल की आयु में देहांत हो गया.

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