Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों रूस समर्थक रुख अपनाने के आरोपों से घिरे हुए हैं. ताजा विवाद उस समय बढ़ा जब पुर्तगाल के राष्ट्रपति मार्सेलो रेबेलो डी सूजा ने ट्रंप पर तीखा बयान दिया. उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे ताकतवर ताकत के राष्ट्रपति “जाहिर तौर पर सोवियत या रूसी एसेट” की तरह व्यवहार कर रहे हैं और एक एजेंट की तरह काम कर रहे हैं.
सूजा का यह बयान उस समय आया है जब ट्रंप खुद को रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए एक प्रमुख मध्यस्थ के तौर पर पेश कर रहे हैं. लेकिन सूजा का मानना है कि ट्रंप की कोशिशों से यूक्रेन को कोई वास्तविक मदद नहीं मिली, बल्कि इससे उसकी स्थिति और कमजोर हो सकती है. उनके अनुसार, ट्रंप के कदम अप्रत्यक्ष रूप से रूस के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहे हैं.
इसे भी पढ़ें: जापान में गूंजा मोदी विजन, टैलेंट और टेक ही बदलेंगे दुनिया
यूरो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, सूजा ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी प्रशासन केवल रूस पर प्रतिबंधों की धमकी देता है, लेकिन अब तक किसी भी ठोस वादे को पूरा नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि नए अमेरिकी नेतृत्व की नीतियों से रूस को रणनीतिक रूप से लाभ मिल रहा है.
इसे भी पढ़ें: राख, अंधेरा और तबाही… एआई वीडियो से कांपा जापान!
वहीं दूसरी ओर, ट्रंप भारत पर भी हमलावर हैं. उन्होंने भारत पर 25 प्रतिशत जवाबी शुल्क और रूसी तेल की खरीद को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया है. ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने भारत की आलोचना तेज कर दी है. उनका कहना है कि रूस से तेल खरीदने का सीधा असर यूक्रेन युद्ध पर पड़ता है और यह पुतिन की “युद्ध मशीन” को धन उपलब्ध कराता है. इस तरह ट्रंप पर दोतरफा दबाव बनता दिख रहा है, एक तरफ यूरोप में उन्हें रूस का समर्थक बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर एशिया में भारत को घेरकर वे अपने विरोधियों के निशाने पर आ रहे हैं. कुल मिलाकर, ट्रंप की नीतियां न केवल अमेरिका के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी गहरे विवादों को जन्म दे रही हैं.