Beggars Free State: मिजोरम विधानसभा ने बुधवार को बहस और विपक्ष की आपत्तियों के बीच ‘मिजोरम भिक्षावृत्ति निषेध विधेयक, 2025’ पारित कर दिया. समाज कल्याण मंत्री लालरिनपुई द्वारा पेश किए गए इस विधेयक का उद्देश्य केवल राज्य में भीख मांगने पर प्रतिबंध लगाना नहीं है, बल्कि भिखारियों को पुनर्वास और स्थायी आजीविका विकल्प उपलब्ध कराना भी है.
गैर-स्थानीय भिखारियों की बढ़ती आशंका
मंत्री ने बताया कि सैरांग-सिहमुई रेलवे स्टेशन के खुलने के बाद अन्य राज्यों से भिखारियों के मिजोरम आने की संभावना बढ़ जाएगी. ऐसे में सरकार का लक्ष्य है कि राज्य को एक ‘भिक्षावृत्ति मुक्त क्षेत्र’ के रूप में विकसित किया जाए.
भिखारियों के लिए राहत और पुनर्वास केंद्र
विधेयक के अंतर्गत सरकार एक राज्य स्तरीय राहत बोर्ड का गठन करेगी और ‘रिसीविंग सेंटर’ स्थापित किए जाएंगे, जहां पकड़े गए भिखारियों को अस्थायी रूप से रखा जाएगा। 24 घंटे के भीतर उन्हें उनके गृह राज्य या मूल स्थान पर भेजा जाएगा.
विपक्ष का विरोध
विपक्षी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) के नेता लालचंदमा राल्ते सहित कई सदस्यों ने इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह कानून ईसाई धर्म की मूल भावना, जो करुणा और दया पर आधारित है, के विरुद्ध है. उनका यह भी मानना है कि यह विधेयक राज्य की मानवीय छवि को नुकसान पहुंचा सकता है.
राजधानी में 30 से अधिक भिखारी
समाज कल्याण विभाग द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, राजधानी आइजोल में 30 से अधिक भिखारी हैं, जिनमें से अधिकतर गैर-स्थानीय हैं. लंबी चर्चा के बाद विधेयक को पारित कर दिया गया, जिसमें कुल 13 विधायकों ने भाग लिया. अब देखना यह होगा कि इस कानून को लागू करने की दिशा में सरकार किस प्रकार व्यावहारिक कदम उठाती है.
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