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अश्विन से लेकर प्रवीण तक, धोनी की कप्तानी में डेब्यू, लेकिन इन 5 खिलाड़ियों ने विदाई पहले ली


Ravichandran Ashwin to Praveen Kumar: भारतीय क्रिकेट के दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने बुधवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आईपीएल से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया. अश्विन ने कुछ महीने पहले ही इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहा था और अब उन्होंने टी20 लीग से भी दूरी बना ली है. आईपीएल में अश्विन ने पांच अलग-अलग फ्रेंचाइज़ियों का प्रतिनिधित्व किया और अपनी ऑफ-स्पिन गेंदबाजी से कई मुकाबले जिताए. दिलचस्प बात यह है कि अश्विन ने अपना इंटरनेशनल डेब्यू महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में किया था, लेकिन उनसे पहले ही क्रिकेट को अलविदा कह दिया. वैसे सिर्फ अश्विन ही नहीं, बल्कि ऐसे कई खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने धोनी के बाद भारतीय टीम में कदम रखा लेकिन किसी न किसी वजह से जल्दी ही संन्यास लेना पड़ा. आइए नजर डालते हैं उन पांच भारतीय खिलाड़ियों पर जिन्होंने धोनी के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट खेलना शुरू किया लेकिन अब मैदान से दूर हैं.

रविचंद्रन अश्विन का संन्यास

रविचंद्रन अश्विन ने आईपीएल से लिया संन्यास. फोटो- सोशल मीडिया.

अश्विन का नाम भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल स्पिनरों में गिना जाता है. उन्होंने 2010 में धोनी की कप्तानी में इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा. टेस्ट क्रिकेट में 500 से ज्यादा विकेट लेने वाले अश्विन का करियर बेहद शानदार रहा. वहीं आईपीएल में भी उन्होंने 221 मैचों में 187 विकेट हासिल किए. उनकी इकोनॉमी रेट 7.20 रही, जो टी20 फॉर्मेट में बेहतरीन मानी जाती है. चेन्नई सुपर किंग्स से अपने आईपीएल करियर की शुरुआत करने वाले अश्विन ने पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और राइजिंग पुणे सुपरजाएंट जैसी टीमों के लिए भी खेला. अश्विन ने बताया कि अब वे खेल से पूरी तरह संन्यास लेकर अपने परिवार और भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देंगे.

अधूरी कहानी वाला बल्लेबाज अंबाती रायडू

अंबाती रायडू उन भारतीय खिलाड़ियों में शामिल रहे जिन्होंने अपनी प्रतिभा से सबको प्रभावित किया लेकिन परिस्थितियां उनके करियर के रास्ते में दीवार बन गईं. 2013 में जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे डेब्यू करने वाले रायडू ने 55 वनडे में 47.05 की शानदार औसत से रन बनाए. उन्होंने तीन शतक और 10 अर्धशतक भी लगाए. 2019 वर्ल्ड कप में जब सेलेक्टर्स ने उन्हें नजरअंदाज कर विजय शंकर को मौका दिया, तब उन्होंने अचानक रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया. हालांकि बाद में वापसी भी की, लेकिन वह फिर कभी इंटरनेशनल क्रिकेट नहीं खेल पाए. आईपीएल में वे मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के लिए चमके और कई ट्रॉफियां टीम को जिताईं. 2023 सीज़न के बाद उन्होंने आईपीएल को भी अलविदा कह दिया.

कई जीत दिलाने वाले योद्धा आरपी सिंह

उत्तर प्रदेश के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज आरपी सिंह भारतीय क्रिकेट के लिए कई अहम मौकों पर हीरो साबित हुए. 2007 टी20 वर्ल्ड कप में उनकी भूमिका को कौन भूल सकता है, जब उन्होंने धोनी की कप्तानी में भारत को पहली बार खिताब जिताने में बड़ा योगदान दिया. उन्होंने अपने इंटरनेशनल करियर में 82 विकेट लिए. आईपीएल में भी उन्होंने 90 विकेट चटकाए और डेक्कन चार्जर्स को 2009 में चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई. लेकिन फिटनेस और निरंतरता की कमी के चलते उनका करियर लंबा नहीं चला. सितंबर 2018 में उन्होंने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास ले लिया.

सचिन के आखिरी मैच के हीरो प्रज्ञान ओझा 

प्रज्ञान ओझा का करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा. 2009 में धोनी की कप्तानी में टी20 डेब्यू करने वाले इस बाएं हाथ के स्पिनर ने टेस्ट क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन किया. उन्होंने 24 टेस्ट में 113 विकेट लिए. 2013 में वेस्टइंडीज के खिलाफ मुंबई में खेला गया सचिन तेंदुलकर का आखिरी टेस्ट मैच ओझा के लिए भी खास रहा, क्योंकि उस मुकाबले में उन्होंने 10 विकेट लिए और ‘मैन ऑफ द मैच’ बने. इसके बावजूद उनका करियर लंबा नहीं चला और वे टीम इंडिया से बाहर हो गए. आखिरकार उन्होंने 2020 में आधिकारिक रूप से संन्यास की घोषणा कर दी.

स्विंग के उस्ताद प्रवीण कुमार 

मेरठ के स्विंग गेंदबाज प्रवीण कुमार ने 2007 में पाकिस्तान के खिलाफ डेब्यू किया और जल्दी ही टीम इंडिया के अहम सदस्य बन गए. उनकी खासियत नई गेंद से दोनों तरफ स्विंग कराने की थी. उन्होंने 6 टेस्ट में 27 और 68 वनडे में 77 विकेट लिए. 2011 वर्ल्ड कप टीम का भी वे हिस्सा बनने वाले थे लेकिन चोट के कारण बाहर हो गए. यही उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. इसके बाद वे आईपीएल में कुछ साल खेले लेकिन 2018 में ट्विटर पर एक पोस्ट के जरिए क्रिकेट से रिटायरमेंट की घोषणा कर दी.

धोनी के बाद भी अधूरी रह गई कई कहानियां

महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में डेब्यू करने वाले कई खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट में बड़े सितारे बने, लेकिन कुछ ऐसे भी थे जिनका सफर उम्मीद से पहले ही खत्म हो गया. अश्विन ने अपने खेल को शानदार मुकाम पर पहुंचाकर अलविदा कहा, जबकि रायडू, ओझा, आरपी सिंह और प्रवीण कुमार जैसे खिलाड़ियों का करियर अचानक रुक गया. यह सच है कि क्रिकेट सिर्फ टैलेंट का खेल नहीं, बल्कि अवसर और परिस्थितियों का भी खेल है. अश्विन का संन्यास इस बात की याद दिलाता है कि हर खिलाड़ी के करियर का एक निश्चित पड़ाव होता है और वहां पहुंचकर उसे अलविदा कहना ही पड़ता है.

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