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अच्छा होता अगर अमेरिका संस्था का हिस्सा बना रहता: संयुक्त राष्ट्र

वॉशिंगटन / संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में अमेरिका की राजदूत निक्की हैली ने बुधवार (20 जून) को ऐलान किया कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) से अलग हो गया है. उन्होंने यूएनएचआरसी को राजनीतिक पूर्वाग्रह का ढेर करार देते हुए कहा कि वह अन्य देशों में हो रहे जुल्म की अनदेखी करते हुए इजराइल को कुछ ज्यादा ही निशाने पर लेता है. भारतीय-अमेरिकी राजनयिक हैली ने कहा कि अमेरिका को पाखंडी संस्थाओं के भाषण की जरूरत नहीं है. उन्होंने दावा किया कि मानवाधिकार का दुरूपयोग करने वालों की खातिरदारी की जा रही है और परिषद में निर्वाचित किया जा रहा है.

जिनेवा स्थित मानवाधिकार परिषद संयुक्त राष्ट्र के तहत 47 सदस्यों वाली एक अंतर-सरकारी निकाय है जिस पर मानवाधिकारों को बनाए रखने की जिम्मेदारी है. ट्रंप प्रशासन ने मानवाधिकार परिषद छोड़ने का कदम ऐसे समय में उठाया है जब यूएनएचआरसी ने कल ही अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर बच्चों को अपने माता-पिता से अलग किए जाने के मामलों को लेकर ट्रंप की नीति की आलोचना की थी. विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के साथ विदेश विभाग से संबोधित करते हुए हैली ने मानवाधिकार परिषद से अलग होने के कदम का बचाव करते हुए कहा कि सुधार को लेकर अमेरिका की ओर से की जा रही अपीलों पर ध्यान नहीं दिया गया.

हैली ने कहा, ‘‘जैसा कि हमने एक साल पहले कहा था , हमने कोई प्रगति नहीं देखी
हैली ने मानवाधिकार परिषद से अमेरिका की शिकायतें गिनाते हुए कहा , ‘‘ मानवाधिकार का हनन करने वाले वहां सेवा दे रहे हैं और परिषद में उन्हें निर्वाचित किया जा रहा है. ’’ उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया का सबसे अमानवीय शासन इसकी निगरानी से बचता जा रहा है और परिषद ऐसे देशों को राजनीति के तहत बलि का बकरा बनाती जा रही है जिनके मानवाधिकार रिकॉर्ड सकारात्मक हैं. ’’ हैली ने कहा , ‘‘ जैसा कि हमने एक साल पहले कहा था , हमने कोई प्रगति नहीं देखी, लिहाजा अमेरिका आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से अलग हो रहा है. ’’

पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने यूएन की एक अन्य संस्था यूनेस्को को अमेरिका के इस फैसले से अवगत कराया था
उन्होंने साफ किया कि यह कदम मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं से पीछे हटने का नहीं है. पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने यूएन की एक अन्य संस्था यूनेस्को को अमेरिका के इस फैसले से अवगत कराया था कि वह इस निकाय से अलग हो रहा है. विदेश मंत्री पोम्पियो ने आरोप लगाया कि मानवाधिकार परिषद गलत करने वालों पर चुप रहकर दुरूपयोग को बढ़ावा देती है और उनकी अनुचित निंदा करती है जिन्होंने कोई अपराध ही नहीं किया. उन्होंने कहा, ‘‘ हमें कोई शक नहीं कि किसी जमाने में इस परिषद की दृष्टि बहुत अच्छी थी. लेकिन आज , हमें ईमानदार होने की जरूरत है. मानवाधिकार परिषद मानवाधिकारों का खराब रखवाला है. ’’

ट्रंप प्रशासन के इस फैसले पर संयुक्त राष्ट्र ने निराशा जाहिर की
पोम्पियो ने कहा कि दुनिया पर एक नजर डालने से ही साफ हो जाता है कि मानवाधिकार परिषद अपने घोषित उद्देश्यों में नाकाम हो गयी है. ट्रंप प्रशासन के इस फैसले पर संयुक्त राष्ट्र ने निराशा जाहिर की. अमेरिका के इस कदम पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस का कहना है कि उन्हें अच्छा लगता अगर अमेरिका संस्था का हिस्सा बना रहता. उन्होंने एक बयान में कहा कि मानवाधिकार परिषद संयुक्त राष्ट्र के विस्तृत मानवाधिकार ढांचे का हिस्सा है जो ‘‘ पूरी दुनिया में मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनके संरक्षण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. ’’

अमेरिका के शीर्ष सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस कदम का स्वागत किया है
गुतारेस के प्रवक्ता स्टेफान दुजारिक ने कहा , ‘‘ महासचिव को बेहतर लगता अगर अमेरिका संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में रहता. ’’ वहीं अमेरिका के शीर्ष सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस कदम का स्वागत किया है. सीनेटर मार्को रूबियो का कहना है कि यह बेहद हास्यास्पद है कि वेनेजुएला , चीन और क्यूबा जैसे देशों को इस परिषद की सदस्यता देने पर विचार भी किया जाये. लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद इस कदम का विरोध कर रहे हैं. हालांकि , संयुक्त राष्ट्र में इजराइल के राजदूत डैनी डनोन ने अमेरिका की घोषणा का स्वागत किया है.

इनपुट भाषा से भी