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RTI से हुआ खुलासा, ‘मन की बात’ कार्यक्रम से जुड़ी सूचनाओं के लिए PMO में कोई अधिकारी नहीं

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर महीने के अंतिम रविवार को आकाशवाणी पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देश की जनता से संवाद कायम करते हैं. इस कार्यक्रम के लिए वे लोगों से उनके सुझाव भी मांगते हैं, और लोग भी बड़ी संख्या में पत्र लिखकर, वीडियो भेजकर या फिर सोशल मीडिया के जरिए ‘मन की बात’ कार्यक्रम में शामिल करने के लिए अपने सुझाव भेजते हैं. लेकिन देश की जनता द्वारा भेजे गए सुझावों का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता. सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी में खुद प्रधानमंत्री कार्यालय ने खुलासा किया है कि इन सुझावों का रिकॉर्ड रखने के लिए अलग से किसी अधिकारी की तैनाती नहीं की गई है.

यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय ने सीआईसी को दी है. इसने कहा कि ‘मन की बात’ के लिए विभिन्न स्रोतों से काफी संख्या में सुझाव और शिकायतें मिलती हैं जो विषय-वस्तु की प्रकृति के आधार पर मंत्रालयों और संगठनों को भेज दी जाती हैं.

मुख्य सूचना आयुक्त आर.के. माथुर के समक्ष एक मामले की सुनवाई के दौरान यह सूचना दी गई जिसमें आवेदक असीम टकयार ने पीएमओ से जानना चाहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री को कितने वीडियो, ऑडियो और लिखित संदेश प्राप्त हुए हैं.

सरकारी वेबसाइट माईगॉव डॉट इन के मुताबिक लोगों से कहा जाता है कि वे अपने सुझाव भेजें जिसे प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा. इस कार्यक्रम का प्रसारण हर महीने के आखिरी रविवार को सुबह 11 बजे आकाशवाणी पर होता है जिसमें प्रधानमंत्री लोगों की नियमित जिंदगी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हैं.

आकाशवाणी की वेबसाइट के मुताबिक आकाशवाणी पर अभी तक इन भाषणों के 44 एपिसोड प्रसारित हो चुके हैं और अंतिम एपिसोड का प्रसारण 27 मई को हुआ था. पीएमओ के जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर टकयार ने आयोग का दरवाजा खटखटाकर सूचना का खुलासा किए जाने की मांग की.

पीएमओ के अधिकारी ने माथुर को बताया कि मांगी गई सूचनाओं को एकत्रित नहीं किया जाता है बल्कि विभिन्न दस्तावेजों में यह बिखरा हुआ है. माथुर ने पीएमओ के अधिकारी के जवाब का जिक्र करते हुए अपने आदेश में कहा, ‘पीएमओ में ‘मन की बात’ कार्यक्रम के तहत प्राप्त जानकारियों को देखने के लिए अलग से कोई अधिकारी नहीं है.’