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नीति आयोग की बैठक में बोले नीतीश कुमार, हमें 1651.29 करोड़ रुपये तत्काल दिए जाएं

नई दिल्ली: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को नीति आयोग की बैठक में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग उठाई. उनका रुख केंद्र के प्रति बिल्कुल ही अलग नजर आया. उन्होंने कहा कि कृषि से आय बढ़ने का संकेत नहीं मिल रहा है. उन्होंने कृषि कर्ज माफी को ‘प्रतिगामी कदम’ बताया और केंद्र सरकार की फसल बीमा योजना में खामी का उल्लेख किया.

नीति आयोग की शासी परिषद की चौथी बैठक को संबोधित करते हुए मध्याह्न भोजन योजना के तहत खाना बनाने की परंपरा की जगह लाभ का प्रत्यक्ष अंतरण करने की मांग की. कुमार ने कहा कि किसानों को उनके उत्पादों का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है और कृषि से होने वाली आय में सुधार नहीं होने का संकेत है और यह सरकार की बड़ी चुनौती है.

नीतीश ने नीति आयोग से आग्रह किया कि पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि के माध्यम से विशेष योजना के तहत लंबित योजनाओं को पूरा करने के लिए अवशेष राशि 1651.29 करोड़ रुपये शीघ्र उपलब्ध कराई जाए, ताकि योजनाओं का काम समय पर पूरा किया जा सके. उन्होंने कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना के लिए स्वीकृत राशि में से अवशेष 902.08 करोड़ रुपये के मुकाबले पूर्व में भेजे गए दो प्रस्तावों की स्वीकृति प्राथमिकता के आधार पर दी जाए.

उन्होंने कहा, “पिछले चार वित्त आयोगों की अनुसंशाओं में कुल देय कर राजस्व में बिहार की हिस्सेदारी लगातार कम हुई है- 11वें वित्त आयोग में 11.589 प्रतिशत से घटकर 12वें वित्त आयोग में 11.028 प्रतिशत, 13वें वित्त आयोग में 10.917 प्रतिशत और 14वें वित्त आयोग में 9.665 प्रतिशत हुई. अत: नीति आयोग द्वारा बिहार जैसे पिछड़े राज्यों की विशेष एवं विशिष्ट समस्याओं को देखा जाना चाहिए.”

उनका बयान ऐसे वक्त आया है जब विभिन्न हलकों से किसानों की परेशानी की बात सामने आ रही है और विपक्ष ने केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को लगातार निशाना बनाया है. कुमार ने बिहार को विशेष श्रेणी का दर्जा देने की भी मुखर पैरवी करते हुए कहा कि विकास के विविध मापदंडों पर राज्य राष्ट्रीय औसत से बहुत नीचे है. उन्होंने कहा कि विशेष दर्जा से राज्य का संसाधन बढ़ेगा, बाहरी संसाधनों तक पहुंच बढ़ेगी और निजी निवेश के लिए प्रेरक माहौल बनेगा.

कुमार ने कृषि कर्ज माफी के प्रति आगाह किया और कहा कि अनुभव बताता है कि दीर्घावधि के लिहाज से यह प्रतिगामी कदम है. उन्होंने कहा, “इसका फायदा उन किसानों तक ही सीमित रहता है जिन्होंने कर्ज ले रखा है. कर्ज नहीं लेने वाले या गैर रैयत किसानों को फायदा नहीं मिलता और इन किसानों की संख्या बहुत ज्यादा है. मेरा दृढ़ विश्वास है कि किसानों को लागत रियायत के जरिए मदद देनी चाहिए. ऐसा करके हम किसानों की कुल लागत घटा सकते हैं और फायदे बढ़ा सकते हैं.” प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर अपना दृष्टिकोण साझा करते हुए कुमार ने कहा कि बहुत सारे किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है.