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Coronavirus in India: सबसे बड़े संकट का मुकाबला, देशवासियों को संकल्पशक्ति से जनता कर्फ्यू को सफल बनाना होगा

विश्व में कोरोना वायरस के संक्रमण की भयावहता बढ़ती ही जा रही है। भारत समेत पूरी दुनिया के लोग भविष्य को लेकर आशंकित हैं, क्योंकि इस वायरस के संक्रमण का शिकार होने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कुछ दिनों पहले तक जो बीमारी चीन, ईरान और इटली के साथ चंद अन्य देशों में सीमित दिख रही थी उसने देखते ही देखते महामारी का रूप धारण कर 180 से अधिक देशों को अपनी चपेट में ले लिया है। जहां ढाई लाख से अधिक लोग संक्रमण का शिकार हो चुके हैं वहीं 11 हजार से अधिक की मौत हो चुकी है।

हालांकि कई देशों के वैज्ञानिक कोरोना वायरस को आइसोलेट कर उसे निष्प्रभावी करने वाला टीका तैयार करने में जुट गए हैं, लेकिन उसकी उपलब्धता में एक साल का समय लग सकता है। तब तक देर हो चुकी होगी, क्योंकि कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। चिंता की बात यह है कि खतरा सामने दिखने के बाद भी तमाम लोग जरूरी सतर्कता का परिचय देने से इन्कार कर रहे हैं। ऐसा करके वे अपने साथ-साथ दूसरों के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं।

कोरोना वायरस से संक्रमित लोग तब लापरवाही बरत रहे हैं जब प्रत्येक स्तर पर बार-बार दोहराया जा रहा कि हर कोई और खासकर विदेश यात्रा से लौटे लोग अपने को आइसोलेट करें और संक्रमण के लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्यकर्मियों से संपर्क करें। ऐसे जरूरी निर्देशों की अनदेखी किस तरह संकट को बढ़ाने और हालात को बेकाबू करने का काम कर रही है, इसका पता मशहूर गायिका कनिका कपूर के कारनामे से चलता है। वह पिछले हफ्ते लंदन से मुंबई होते हुए लखनऊ अपने घर आईं। उन्होंने खुद को अलग-थलग करने के बजाय पार्टियों में जाना शुरू कर दिया। वह तीन-चार दिन ऐसा करती रहीं। स्वाभाविक तौर पर उनके कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने की खबर सामने आते ही हड़कंप मचा और उनके परिजनों-परिचितों के साथ उन सबकी तलाश और जांच शुरू हुई जो उन पार्टियों में गए जहां कनिका गई थीं। इसमें दो राय नहीं कि उनकी गैर जिम्मेदाराना हरकत ने एक बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है।

दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक यह है कि कनिका सरीखे लोगों की कमी नहीं। देश के विभिन्न हिस्सों में विदेश से लौटे कई ऐसे लोग सामने आ रहे हैं जो या तो तय जांच प्रक्रिया से गुजरने से इन्कार कर रहे हैं या फिर खुद को अलग-थलग करने के बजाय इधर-उधर घूम रहे हैं। कुछ तो ऐसे भी हैं जो अस्पताल से भाग जा रहे या फिर वहां विशिष्ट व्यक्तियों वाली सुविधाएं चाह रहे हैं। ऐसा करके वे संकट को बढ़ाने का ही काम कर रहे हैं। इनसे सख्ती से निपटने और उनकी निगरानी बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि वे सरकारों की कोशिश पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं।