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DSSC: भारतीय सशस्त्र बलों की तीनों सेवाओं के अधिकारियों को इस छत के नीचे पढ़ाया जाता है पराक्रम का अध्‍याय

नई दिल्‍ली. डिफेंस सर्विसेज स्‍टाफ कॉलेज (Defense Services Staff College) एक ऐसा रक्षा सेवा प्रशिक्षण संस्‍थान है, जहां भारतीय नौसेना, वायु सेना और नौसेना के अधिकारियों को एक छत के नीचे पराक्रम और युद्ध कौशल का पाठ पढ़ाया जाता है. तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में वेलिंग्टन इलाके में स्थिति रक्षा मंत्रालय के इस संस्‍थान में भारतीय सशस्त्र बलों की तीनों सेवाओं के अधिकारियों के अतिरिक्‍त अर्धसैनिक बलों, सिविल सेवाओं में चयनित अधिकारियों, कमांड और स्टाफ नियुक्तियों के लिए मित्र देशों के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाता है. इसी रक्षा प्रशिक्षण संस्‍थान में लेक्‍चर देने के लिए सीडीएस जनरल बिपिन रावत अपनी पत्‍नी मधुलिका रावत और सेना के 14 अन्‍य कर्मियों के साथ विि‍लंगटन के लिए रवाना हुए थे. विलिंग्‍टन पहुंचने से पहले यह हेली काप्‍टर क्रैश हो गया और सभी की दुखद मृत्‍यु हो गई.

उल्‍लेखनीय है कि इस कॉलेज की स्‍थापना ब्रिटिश हुकूमत ने आर्मी स्टाफ कॉलेज के तौर पर 1905 में नासिक के करीब देवलाली इलाके में की थी. हालांकि 1907 में इस कॉलेज को पाकिस्‍तान के क्‍वेटा स्‍थानांतरित कर दिया गया था. 1947 में भारत-पाकिस्‍तान बंटवारे के बाद, इस कॉलेज की स्‍थापना वेलिंग्टन में की गई. इस कॉलेज के पहले कमांडेट के तौर पर ब्रिगेडियर एसडी वर्मा को नियुक्‍त किया गया था. ब्रिगेडियर वर्मा ने महज एक साल से कम के समय इस कॉलेज को प्रशिक्षण के लिए तैयार कर दिया और अप्रैल 1948 में भारतीय सेना के 46, नौसेना और वायु सेना के दो-दो अधिकारियों के साथ पहले स्‍टाफ कोर्स की शुरूआत कर दी गई. 1950 में नेवल विंग की स्‍थापना के साथ कॉलेज का नाम आर्मी स्टाफ कॉलेज से बदलकर डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज कर दिया गया. कुछ सालों के बाद, डीएसएससी में सिविल सर्विसेज के अधिकारियों और मित्र देशों के अधिकारियों का प्रशिक्षण शुरू किया गया.

वरिष्‍ठ सैन्‍य अधिकारी के अनुसार, डिफेंस सर्विसेज स्‍टाफ कॉलेज को विश्व के एक प्रमुख संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण संस्थान के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है. कई विकसित और विकासशील देश अपने अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए डिफेंस सर्विसेज स्‍टाफ कॉलेज का चुनाव कर रहे हैं. वर्तमान समय में डिफेंस सर्विसेज स्‍टाफ कॉलेज के 73वें स्टाफ कोर्स में 36 अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों ने भाग लिया था. इस कॉलेज के कई स्नातक अपने-अपने देशों में शीर्ष पदों पर पहुंचे हैं. डिफेंस सर्विसेज स्‍टाफ कॉलेज के लिए यह बेहद गर्व की बात है कि इसके मॉडल को यूनाइटेड किंगडम, जाम्बिया, श्रीलंका, नाइजीरिया, बोत्सवाना और मध्य पूर्व के कुछ देशों ने अपनाया है. इस कॉलेज में हर साल एक स्टाफ कोर्स चलाता है, जो जून में शुरू होता है और अगले साल अप्रैल में समाप्त होता है. विदेशी और सिविल सेवा के छात्र अधिकारियों के लिए ओरिएंटेशन कोर्स स्टाफ कोर्स शुरू होने से दो सप्ताह पहले आयोजित किया जाता है, ताकि इन छात्रों को पृष्ठभूमि ज्ञान प्राप्त करने और मुख्य पाठ्यक्रम शुरू होने से पहले उन्हें प्रशासनिक रूप से व्यवस्थित करने में मदद मिल सके. वर्तमान में, डीएसएससी में 74वां स्टाफ कोर्स चल रहा है, जिसमें 475 छात्र अधिकारी शामिल हुए हैं.

डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (DSSC) के पूर्व छात्रों में फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के अलावा देश के पहले सीडीएस बिपिन रावत का नाम भी शामिल है. फील्‍ड मार्शल मानेकशॉ और सीएसडी बिपिन रावत के अलावा, जनरल पी. पी. कुमारमंगलम, जनरल तपीश्वर नारायण रैना, जनरल ओम प्रकाश मल्होत्रा, जनरल अरुण श्रीधर वैद्य, जनरल के वी कृष्णा राव, जनरल कृष्णास्वामी सुंदरजी, जनरल विश्वनाथ शर्मा, जनरल सुनीथ फ्रांसिस रोड्रिग्स, जनरल बिपिन चंद्र जोशी, जनरल वेद प्रकाश मलिक, जनरल सुंदरराजन पद्मनाभन, जनरल निर्मल चंदर विजो, जनरल जेजे सिंह, जनरल दीपक कपूर, जनरल वी के सिंह, जनरल बिक्रम सिंह और जनरल मनोज मुकुंद नरवणे भी इस कॉलेज के पूर्व छात्रों की सूची में शामिल हैं.

वहीं नौसेनाध्‍यक्षों में एडमिरल रोनाल्ड लिन्सडेल परेरा, एडमिरल ऑस्कर स्टेनली डॉसन, एडमिरल जयंत गणपत नाडकर्णी, एडमिरल विष्णु भागवती, एडमिरल सुशील कुमार, एडमिरल माधवेंद्र सिंह, एडमिरल अरुण प्रकाश, एडमिरल सुरेश मेहता, एडमिरल रॉबिन के. धवन, एडमिरल सुनील लांबा, एडमिरल करमबीर सिंह भी इस कालेज के पूर्व छात्रों की सूची में शामिल हैं. वहीं, वायु सेना प्रमुख में एयर चीफ मार्शल हृषिकेश मूलगावकर, एयर चीफ मार्शल इदरीस हसन लतीफ, एयर चीफ मार्शल लक्ष्मण माधव कात्रे, एयर चीफ मार्शल सुरिंदर मेहरा, एयर चीफ मार्शल एस के कौली, एयर चीफ मार्शल सतीश सरीन, एयर चीफ मार्शल अनिल यशवंत टिपणीस, एयर चीफ मार्शल श्रीनिवासपुरम कृष्णास्वामी, एयर चीफ मार्शल शशिंद्र पाल त्यागी, एयर चीफ मार्शल प्रदीप वसंत नायको, एयर चीफ मार्शल अरूप रहा और एयर चीफ मार्शल बीरेंद्र सिंह धनोआ भी डीएसएससी के छात्र रह चुके हैं.

जर्मन विशेष बलों के प्रमुख हंस-क्रिस्टोफ अम्मोन, नाइजीरिया के राष्ट्रपति और पूर्व सैन्य प्रमुख मुहम्मदु बुहारी, पूर्व नाइजीरियाई राष्ट्रपति ओलुसेगुन ओबासंजो, फिजी के तीसरे प्रधानमंत्री सिटिवनी राबुका ओबीई, श्रीलंका के वर्तमान राष्ट्रपति लेफ्टिनेंट कर्नल गोटाभाया राजपक्षे और नामीबियाई सेना के मेजर जनरल मैथियस अलुएन्डो भी डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज के पूर्व छात्रों की सूची में शामिल हैं.

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