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क्या है एड्स की बीमारी, कैसे फैलती है यह और क्या है इसका इलाज जानिए

World AIDS day: 1970 -80 के दशक में एड्स (AIDS- acquired immune deficiency syndrome) दुनिया के लिए सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक थी. जिसे एड्स हो जाता था, उसे अछूत की तरह देखा जाता था. दरअसल, एड्स एचआईवी (human immunodeficiency virus -HIV) का आखिरी चरण है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पूरी तरह से खत्म हो जाती है. अगर व्यक्ति को एड्स हो जाए तो किसी भी तरह के इंफेक्शन को रोकने में शरीर नाकाम हो जाता है.

WHO के मुताबिक दुनिया भर में आज भी 3.77 करोड़ लोग एचआईवी पॉजिटिव हैं. हालांकि अच्छी बात यह है कि आज एचआईवी पॉजिटिव मरीजों के लिए एंटीरेट्रोवायरल दवाई (antiretroviral treatment -ART) आ गई है जिससे मरीज में वायरस का प्रसार खून तक नहीं हो पाता है. आइए एड्स के बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं.

एचआईवी पहले से संक्रमित व्यक्ति से प्रत्यक्ष संपर्क के आधार पर ही एक-दूसरे के शरीर में प्रवेश करता है. यानी
यदि संक्रमित व्यक्ति का खून किसी भी तरह से दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर गया, तो एचआईवी का संक्रमण हो जाएगा.
यदि संक्रमित व्यक्ति का सीमेन (वीर्य) या प्री सेमिनल फ्लूड दूसरे व्यक्ति में प्रवेश करेगा, तभी एचआईवी होगा.
यदि संक्रमित व्यक्ति का रेक्टल फ्लूड (गुदाद्वार से निकला तरल पदार्थ) दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाए, तभी एचआईवी होगा.
यदि संक्रमित व्यक्ति का वेजाइनल फ्लूड दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाए या बिना सुरक्षात्मक उपाय किए संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाए जाए तभी दूसरे व्यक्ति में एचआईवी फैलेगा.
मां का दूध भी बच्चों में एचआईवी फैला सकता है.
इस तरह देखा जाए तो असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकले खून या संक्रमित व्यक्ति को दिए गए इंजेक्शन के नीडिल से दूसरे व्यक्ति को इंजेक्शन दिया जाए, तो एचआईवी हो सकता है.

एचआईवी पॉजिटिव हो जाने के बाद रोगी के लिए मामूली चोट या बीमारी से उबरना मुश्किल हो जाता है. कुछ व्यक्तियों में एचआईवी का संक्रमण होने के 2 से चार सप्ताह बाद फ्लू जैसे लक्षण दिखने लगते हैं. ये लक्षण कई सप्ताह तक रह सकते हैं. इसके अलावा कई अन्य लक्षण भी हैं.- जैसे-
बुखार
बहुत ज्यादा ठंड लगना
लाल चकते
रात में पसीना आना
मांसपेशियों में ऐंठन
गले में खरांश
थकान
नसों में सूजन
मुंह का अल्सर

एचआईवी को अब पूरी तरह से रोका जा सकता है. एचआईवी हो जाने पर एंटीरेट्रोवायरल दवा (antiretroviral treatment -ART) के द्वारा एचआईवी के इंफेक्शन को शरीर में बढ़ने से रोका जा सकता है. अगर किसी मां को एचआईवी है तो भी एआरटी दवा देकर बच्चे में एचआईवी होने से रोका जा सकता है. इसके अलावा जो लोग एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (antiretroviral therapy) ले रहे हैं और उनमें वायरस के प्रसार को दबा दिया गया है तो यौन संबंध बनाए जाने के बावजूद वह अपने पार्टनर में एचआईवी नहीं फैला सकते. हालांकि एचआईवी के फैलने से रोकने का सबसे बेहतर उपाय है सुरक्षित यौन संबंध को अपनाना.

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