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IPL कॉमेंट्री : शास्त्री और द्रविड़ को लेकर BCCI और CoA में टकराव!

नई दिल्ली : आईपीएल में भारतीय क्रिकेट दिग्गजों की कॉमेंट्री खास तौर पर पसंद की जाती है. बीसीसीआई की ओर से इस समय आईपीएल प्लेऑफ के कॉमेंट्री पैनल में सुनील गावस्कर और संजय मांजरेकर के नाम ही रहे. लेकिन अगले साल दो नए खास नाम और आने की संभावना है जो इस समय राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख पदों पर मौजूद हैं. लेकिन ये दो नाम आते ही विवाद हो गया और बीसीसीआई और प्रशासकों की समिति (सीओए) आमने सामने आ गए.

हाल ही में जारी एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय क्रिकेट दो प्रमुख कोच रवि शास्त्री और राहुल द्रविड़ को अगले साल आईपीएल कॉमेंट्री करने की इजाजत देने के मामले में बीसीसीआई और सीओए के बीच एक बार फिर टकराहट हो गया है. कहा जा रहा है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो अगले साल के आईपीएल में दर्शक इन दोनों दिग्गज को कॉमेंट्री करते देख सकते हैं. इस समय टीम इंडिया के लिए रवि शास्त्री मुख्य कोच और राहुल द्रविड़ अंडर 19 टीम के कोच हैं.

उल्लेखनीय है कि बीसीसीआई और सीओए के बीच टकराहट कोई नई बात नहीं हैं. पहले भी ऐसा कई बार हो चुका है कि किसी बात को लेकर दोनों आमने सामने हों. पिछले महीने ही टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली के अफगानिस्तान टेस्ट को छोड़कर काउंटी क्रिकेट को चुनने को लेकर भी दोनों में टकराव हुआ था.

इस मीडिया रिपोर्ट के अऩुसार सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त की गई प्रशासकों की समिति (सीओए) इस नियम पर पुनर्विचार कर रही है जिसकी शास्त्री और द्रविड़ को कोच रहते आईपीएल में कॉमेंट्री करने की इजाजत नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक इस निर्णय से बीसीसीआई अधिकारी हैरत में है, उनका कहना है कि पहले भी ‘हितों का टकराव’ के नियम के तहत पहले दोनों ही कोच को दोहरी भूमिका नहीं दी गई थी क्योंकि दोनों ही राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख पदों पर हैं.

रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया है कि सीओए का हितों के टकराव के इस नियम पर पुनर्विचार करना, जिसकी वजह से शास्त्री और द्रविड़ को कॉमेंट्री करने की इजाजत मिल जाएगी, यह उनका (सीओए का) ओछा व्यवहार दर्शाता है. वे अपने कार्य के प्रति ईमानदार नहीं हैं. और हरएक चीज को पूर्वाग्रह के चश्मे से देखते हैं जिसका परिणाम यह है कि उन्हें बीसीसीआई के प्रशासन की निगरानी करने का काम सौंपा गया है लेकिन उनकी सोच इसके विपरीत है जो उनके कार्यों में बेईमानी को दर्शाता है.

विवादास्पद रहे कुछ निर्णय सीओए के
रिपोर्ट में इस सूत्र ने उदाहरण के तौर पर यह बताया की जब सीओए के प्रमुख विनोद राय का कार्यकाल खत्म हो चुका है तब भी वे क्यों अपनी जिम्मेदारियां निभाए जा रहे हैं. सूत्र ने खास उदाहरण देते हुए बताया “समिति का प्रमुख निर्णय था कि कुछ अधिकारियों को अयोग्य घोषित कर उन्हें कमेटी मीटिंग में भाग लेने तक से मना कर दिया गया था जबकि विशेष तौर पर एन राम को मीटिंग का भाग लेने के लिए कहा गया जबकि उनकी भी उम्र 70 साल से ज्यादा है और इस आधार पर ही उन्हें ऑफिस जारी रखने के लिए अयोग्य माना गया था. इससे ज्यादा विनोद राय का कार्यों में दोहरापन क्या हो सकता है. ये बिलकुल वैसा ही है कि कोई बच्चा सिर्फ इसलिए दोबारा बैटिंग मांग रहा हो क्योंकि बैट उसका है.