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Assam Madrasa: असम में हैं 610 सरकारी मदरसे, सालाना होता है 260 करोड़ का खर्च

गुवाहाटी। राज्य में 610 सरकारी मदरसे बंद करने के लिए सोमवार को असम विधानसभा में विधेयक पेश किया गया। भारी हंगामे के बीच तीन दिवसीय शीतकालीन सत्र के पहले दिन राज्य के शिक्षा एवं वित्त मंत्री हेमंत बिश्व सरमा ने विधेयक को सदन के पटल पर रखा। इसके तहत पहली अप्रैल, 2021 से सरकारी मदरसों को सामान्य स्कूलों में बदलने का शुरू कर दिया जाएगा। विपक्षी दलों कांग्रेस और एआइयूडीएफ ने विधेयक का पुरजोर विरोध किया।

सरमा ने कहा, ‘सदन से विधेयक पास होते ही सरकारी मदरसों के संचालन की व्यवस्था खत्म हो जाएगी। आजादी से पहले मुस्लिम लीग ने इस व्यवस्था को शुरू किया था।’ कांग्रेस और एआइयूडीएफ ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि सत्ता में वापसी पर मदरसा शिक्षा को बहाल किया जाएगा। अप्रैल-मई में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले सरमा ने कहा था कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को पंथनिरपेक्ष बनाना चाहती है और इसलिए सरकार द्वारा संचालित 610 मदरसे बंद किए जाएंगे।

13 दिसंबर को मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की उपस्थिति में मंत्रिमंडल की बैठक में सरकारी मदरसों और संस्कृत स्कूलों को बंद करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। सरमा ने बताया कि सभी सरकारी मदरसों को सामान्य स्कूलों में बदल दिया जाएगा और संस्कृत पाठशालाओं को कुमार भास्करवर्मा संस्कृत विश्वविद्यालय को सौंप दिया जाएगा। इन संस्कृत पाठशालाओं को भारतीय संस्कृति, सभ्यता एवं राष्ट्रवाद के अध्ययन का केंद्र बनाया जाएगा। निजी मदरसे बंद नहीं किए जाएंगे। सरमा ने कहा कि इन सरकारी मदरसों पर सरकार सालाना 260 करोड़ रुपये खर्च करती है। धर्म विशेष की शिक्षा के लिए जनता के पैसे को इस तरह खर्च नहीं किया जा सकता है।