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जब कैंसर से जूझते इरफान खान ने देखा विवियन रिचर्ड्स का मुस्कराता हुआ पोस्टर

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नई दिल्ली: कैंसर से जिंदगी की जंग लड़ रहे बॉलीवुड अभिनेता इरफान खान ने हाल ही में एक खत लिखकर अपनी स्थिति के बारे में जानकारी दी. इरफान खान ने कहा कि उन्होंने नतीजों की चिंता किए बगैर ‘ब्रह्मांडीय शक्ति’ में भरोसा करते हुए दर्द, भय और अनिश्चितता के जरिये अपनी लड़ाई लड़ी. अभिनेता ने इस साल पांच मार्च को इस बीमारी से पीड़ित होने का सार्वजनिक तौर पर खुलासा किया था. वह लंदन में उपचार करा रहे हैं. इरफान ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से साझा किये गए अपने एक नोट को टि्वटर पर डाला है. इसमें उन्होंने कहा है कि उन्हें इस बात की जानकारी मिली थी कि यह बीमारी दुर्लभ प्रकार की है. उपचार से संबंधित अनिश्चितता और कुछ मामलों के अध्ययन के बाद वह इलाज का सामना के लिए तैयार थे.

इरफान ने कहा कि उस दौर में ऐसा महसूस हुआ कि वह तेज रफ्तार ट्रेन से यात्रा कर रहे हों और अचानक किसी ने यह संकेत देते हुए ट्रेन से उतरने को कहा कि वह गंतव्य तक पहुंच चुके हैं. उन्होंने लिखा है, ‘‘दुख के कारण मुझे यह महसूस हुआ है कि आप सागर की अप्रत्याशित लहरों के बीच कॉर्क की भांति तैर रहे हों और आप हरसंभव तरीके से उसे नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हों. ताज्जुब और भय के घालमेल में, अस्पताल का दौरा करते समय में अपने बेटे से काफी देर बात करता था.’’

बता दें कि कुछ साल पहले क्रिकेटर युवराज सिंह को कैंसर डायग्नोस हुआ था, लेकिन युवराज सिंह ने मजबूत इच्छाशक्ति के सहारे इस खतरनाक बीमारी पर काबू पाया और इससे पूरी तरह उबर गए. जहां तक क्रिकेट का सवाल है तो वह किसी के लिए एक खेल है लेकिन किसी के लिए यह भावना है तो किसी के लिए लाइफलाइन है.

न्यूरोइंडोक्राइन ट्यूमर से जूझ रहे इरफान खान लंदन में अपना इलाज करा रहे हैं. इस दिग्गज अभिनेता ने बताया कि अपने दर्द को कम करने के लिए इरफान क्रिकेट के दिलचस्प मुकाबले देख रहे हैं. उन्हें इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच, लार्ड्स में हुए मुकाबले को देखते पाए गए थे.

इरफान ने लिखा कि यह दर्द भी मुझे क्रिकेट देखने से नहीं रोक सकता. इरफान ने एक अखबार को लिखे पत्र में कहा, जब मैं अस्पताल में निराश और टूटा हुआ पहुंचा तो मुझे अहसास नहीं था कि मेरे कमरे की खिड़की के सामने लार्ड्स स्टेडियम है. मेरे बचपन के सपनों का ‘मक्का’. वहां मैंने विवियन रिचर्ड्स का मुस्कराता हुआ पोस्टर देखा. इसे देखने पर पहली नजर में मुझे कोई एहसास ही नहीं हुआ. मानो वह दुनिया कभी मेरी थी ही नहीं.

इरफान ने लिखा, पहली बार मुझे अहसास हुआ कि स्वतंत्रता का सही अर्थ क्या है. मुझे लगा मैं जीवन को पहली बार इतने करीब से देख रहा हूं. ब्रह्मांड की बौद्धिकता में मेरा विश्वास निरपेक्ष लगने लगा. मैं एकमात्र उम्मीद यही कर सकता हूं कि मैजूदा हालात में कोई और मुश्किल नहीं जुड़ेगी.

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