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स्वर्गीय नरेंद्र मोहन स्मृति व्याख्यानमाला में योगेंद्र नारायण बोले, संघीय ढांचे के लिए कांटा बन चुका है अनुच्छेद 356

नई दिल्ली। राज्यसभा के पूर्व महासचिव योगेंद्र नारायण ने संविधान के अनुच्छेद 356 को समाप्त किये जाने की जरूरत बताई है। अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग की फेहरिश्त बताते हुए उन्होंने इसे केंद्र और राज्यों के बीच टकराव की शुरुआत का मूल करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने संघीय ढांचे को और मजबूत बनाने के लिए राज्यपालों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और गृहमंत्री की सदस्यता वाली एक चयन समिति के गठन का सुझाव दिया।

उन्होंने जीएसटी को केंद्र-राज्य के संयुक्त शासन के स्वरूप नई शुरुआत बताते हुए जन कल्याणकारी योजनाओं के लिए भी जीएसटी काउंसिल की तर्ज पर राष्ट्रीय विकास काउंसिल के रूप में एक नए वैधानिक संस्था के गठन की वकालत की। दैनिक जागरण समूह के प्रधान संपादक संजय गुप्त ने यह सुनिश्चित करने की जरूरत बताई कि राजनीतिक दलों के आपसी टकराव के बीच आम जनता नहीं पीसना पड़े।

दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक स्वर्गीय नरेंद्र मोहन की स्मृति में ‘संघीय ढांचा और राष्ट्रीय हित’ विषय पर आयोजित व्याख्यानमाला में बोलते हुए योगेंद्र नारायण ने कहा ‘अनुच्छेद 356 भारत के संघीय ढांचे के लिए एक कांटा बन चुका है।’ उन्होंने बताया कि किस तरह पहली बार इस प्रावधान को अंग्रेजों ने 1935 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट में शामिल किया था, जिसे आजादी के बाद हमने ज्यों का त्यों अपना लिया।