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सावधान: MP में चल रहा है भीख का ‘नशीला’ कारोबार, बीमार नहीं नशे में है बच्चा!

मध्य प्रदेश में बच्चों को नशे का डोज देकर उनके नाम पर भीख मांगी जा रही है. हाल ही में पकड़ में आए गिरोह से जो जानकारी मिल रही है वो चौंकाने वाली है. भोपाल प्रशासन ने हाल ही में ऑपरेशन खुशहाल नौनिहाल चलाकर भीख मांगने वाले गिरोह का पर्दाफ़ाश किया था. इस गिरोह से करीब 100 बच्चे मुक्त कराए गए थे. अब तक की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. भिखारी अपनी गोद में बेसुध बच्चा लेकर भीख मांगते थे. बच्चों के नाम पर लोग भावुक हो जाते हैं और इन्हें भरपूर भीख मिल जाती है. लोग बच्चे को बीमार समझकर दया में भीख दे देते हैं.

भीख के लिए नशा

गिरोह के पकड़े जाने पर जांच में खुलासा हुआ है कि भिखारियों की गोद में जो बेहोश बच्चा रहता है, दरअसल वो बीमार ना होकर नशे में रहता है. भिखारी ज़्यादा पैसा कमाने के चक्कर में इन बच्चों को नशीला पदार्थ खिला देते हैं, ताकि बच्चा बेहोश बना रहे और लोग तरस खाकर उसे भरपूर भीख दे दें.इसी लाचारी का फायदा उठाकर उनके साथ मौजूद केयर टेकर को ज्यादा से ज्यादा भीख मिलती है. जिन भिखारियों के पास बेसुध बच्चे होते हैं उन्हें बाक़ी भिखारियों की तुलना में 300 रुपए ज्यादा तक भीख़ मिल जाती है.

पूरे देश में फैला है जाल

भिखारियों के गिरोह का नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है. गिरोह कानपुर, हैदराबाद, नागपुर के अलावा राजस्थान से संचालित हो रहा है. इतना ही नहीं, ये लोग अपने गिरोह में शामिल हो चुकी नाबालिग लड़कियों की शादी कर उनके बच्चों के जरिए भी भीख मांगता है. महिला भिखारी अपने साथ किराए के बच्चों को भी रखती हैं.

-भोपाल में लगभग 1 हजार बच्चों से भीख मंगवायी जा रही है.
-मध्यप्रदेश में 28 हजार 695 भिखारी होने का अनुमान
-नशे में होने की वजह से बच्चे बीमार और कमजोर दिखाई देते हैं.
-मुख्य तिराहे-चौराहों और धार्मिक स्थलों पर प्रोफेशनल भिखारियों का जमावड़ा रहता है.

भीख़ मांगना अपराध

मध्यप्रदेश भिक्षावृत्ति निवारण अधिनियम 1973 के तहत भीख मांगना दंडनीय अपराध है.इतना ही नहीं इस कानून के तहत भिखारियों के पुनर्वास और ट्रेनिंग देकर सामान्य जीवन में लौटने के उपाय करने का भी प्रावधान है.इस कानून का पालन कराने की ज़िम्मेदारी सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग की है.अधिनियम के तहत भिखारी के रूप में पहली बार भीख मांगते पकड़े जाने पर दो साल और दूसरी बार में 10 साल की जेल का प्रावधान है.

ऑपरेशन खुशहाल-नौनिहाल

भोपाल प्रशासन ने जो ऑपरेशन खुशहाल-नौनिहाल चलाया था उसमें गिरोह के चंगुल से 100 से ज़्यादा बच्चे छुड़वाए गए थे. लेकिन अब तक उन बच्चों के बारे में ये पता नहीं चल सका है कि वो कौन हैं और कहां से लाए गए हैं. बच्चों के साथ जो 25 लोग पकड़े गए थे वो खुद को उनका अभिभावक बता रहे हैं. उन सभी को जेल भेज दिया गया है. बच्चों के घर-परिवार का पता लगाने के लिए दूसरे राज्यों में पुलिस टीम भेजी गयी हैं. पुलिस की कोशिश इस गिरोह से संचालकों तक पहुंचने की है,जो एमपी में भीख का नशीला कारोबार चला रहा है.