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मोदी के शपथ समारोह में इमरान को नहीं बुलाने पर पाकिस्तान में बहस

लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद नरेंद्र मोदी 30 मई को लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे.

गुरुवार की शाम राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें आठ हजार मेहमानों के शिरकत होने की बात कही जा रही है.

यह पहली दफ़ा है जब किसी प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में इतनी बड़ी संख्या में मेहमान शामिल हो रहे हैं.

समारोह में भारत और छह अन्य देशों के संगठन बिमस्टेक के सभी देशों – नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड – के राष्ट्राध्यक्ष मौजूद रहेंगे.

इनके अलावा मॉरिशस और किर्गिस्तान के भी राष्ट्राध्यक्ष शपथ समारोह में आएँगे.मगर इस बार भारत ने अपने पड़ोसी पाकिस्तान को न्योता नहीं भेजा है.

हालाँकि पाकिस्तान में कुछ लोगों को उम्मीदें थीं कि उनका देश भी भारत के इस बेहद ख़ास पल का गवाह बनेगा.पुलवामा हमले और बालकोट एयर स्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में तल्खी बढ़ी है और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हर चुनावी रैली में राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाया था.

हालांकि चुनावों में उनकी प्रचंड जीत के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने जिस लहज़े में उन्हें जीत की बधाई दी थी, उसके बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि हो सकता है कि पिछली बार की तरह इस बार भी मोदी के राज्याभिषेक के मौके पर पाकिस्तान को बुलाया जा सकता है.

इतना ही नहीं इमरान खान ने चुनावों से पहले कहा था कि अगर भारत के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत होती है और नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनते हैं तो शांति वार्ता की संभावना ज़्यादा रहेगी.

विदेशी पत्रकारों से बातचीत में इमरान ने कहा था कि “बीजेपी दक्षिणपंथी पार्टी है और वो जीतती है तो कश्मीर को लेकर बातचीत आगे बढ़ सकती है.”

मोदी की जीत के बाद पाकिस्तान की मीडिया में इस बात पर बहस हो रही थी कि निमंत्रण मिलने पर प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को भारत जाना चाहिए या नहीं.

पाकिस्तान की समा टीवी के न्यूज़ डिबेट में एंकर विश्लेषक से सवाल करती है, “अगर न्योता दिया जाता है तो इमरान ख़ान को भारत जाना चाहिए?”

विश्लेषक कहते हैं, “मेरे ख्याल में ज़रूर जाना चाहिए. इमरान ख़ान को मैं मुबारकबाद देता हूं. उनकी ख़्वाहिश ये थी और उसका इन्होंने इज़हार किया था कि अगर नरेंद्र मोदी दोबारा चुने जाते हैं तो रिश्ते बेहतर हो जाएंगे. उन्होंने नरेंद्र मोदी की जीत पर संदेश भी भेजा था.”

वहीं दूसरे विश्लेषक कहते है, “वो न भी जाएं तो बहुत फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि समारोह में कोई बातचीत तो होगी नहीं.”

“हां, अगर बातचीत के लिए विशेष तौर पर बुलाया जाता है तो परिणाम बेहतर निकलेंगे. क्योंकि जब इमरान ख़ान ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया था, तो नरेंद्र मोदी नहीं आए थे.”