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मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह मामले में सीबीआई को जाँच 3 महीने में पूरी करने के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मुज़फ़्फ़रपुर के बालिका गृह कांड की जाँच तीन महीने में पूरी करने के आदेश दिए हैं.

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने 11 लड़कियों की कथित हत्या के मामले में सीबीआई को 2 जून तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था. सीबीआई की ओर से बताया गया कि 11 लड़कियां गायब हैं जिनकी हत्या का संदेह है करीब 35 लड़कियों के नाम एक जैसे हैं.

सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने रिपोर्ट दाखिल की थी.

सुप्रीम कोर्ट में मौजूद पत्रकार सुचित्र मोहंती ने बताया कि सीबीआई को कोर्ट ने फटकार लगाई है और जल्दी जांच पूरी करने का आदेश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने के भीतर जवाब मांगा है, हालाँकि सीबीआई ने छह महीने का समय मांगा था. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रखकर जाँच एजेंसी को तीन महीने की मोहलत दी है.न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ​​और न्यायमूर्ति एमआर शाह की अध्यक्षता वाली पीठ ने सीबीआई से कहा है कि वे भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 (अप्राकृतिक सेक्स) के तहत आरोपों की जांच करें. साथ ही जाँच एजेंसी को कथित वीडियो रिकॉर्डिंग, लड़कियों के यौन शोषण और मानव तस्करी की भी जांच करने का आदेश दिया.

मीडिया में बालिका गृह में लड़कियों का यौन उत्पीड़न होने की ख़बरों के बाद टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़ (TISS) ने अपनी रिपोर्ट तैयार की थी.

रिपोर्ट में वहां रहने वाली बच्चियों के साथ यौन दुर्व्यवहार से लेकर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की जानकारी दी गई थी, ये रिपोर्ट 26 मई 2018 को समाज कल्याण विभाग के निदेशक तक पहुंची.
विभाग ने 29 मई 2018 को बालिका गृह को खाली करा लिया गया और वहां रहने वाली सभी 44 बच्चियों को बेहतर देखभाल और सुरक्षा मुहैया कराने के लिए राज्य के दूसरे शेल्टर होम में शिफ़्ट कर दिया गया.

इनमें से 14 बच्चियों को बालिका गृह मधुबनी में, 14 को बालिका गृह मोकामा में और बाकी 16 लड़कियों को बालिका गृह, पटना भेजा गया था.

31 मई 2018 को बिहार के समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन सहायक निदेशक दिवेश शर्मा के बयान के आधार पर मुज़फ़्फ़रपुर महिला थाने में इस मामले में पहली एफ़आईआर दर्ज हुई थी और पुलिस इसकी जांच में लग गई.

मुज़फ़्फ़रपुर पुलिस ने 11 नामजद अभियुक्तों में से 10 को तुरंत गिरफ़्तार भी कर लिया. जिसमें मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर भी शामिल थे.

बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए और निष्पक्ष जांच का हवाला देकर बिहार सरकार ने बालिका गृह कांड की जांच का जिम्मा सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इनवेस्टिगेशन यानी सीबीआई को दे दिया.