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भारत में खेलो इंडिया जैसे गेम्स की शुरुआत अमेरिका जैसी,भारतीय खिलाड़ी बन सकते हैं दबदबा

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पहले खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स शुक्रवार से ओडिशा में शुरू होने जा रहे हैं। यूनिवर्सिटी स्तर पर खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए ये खेल मंत्रालय की शानदार पहल है। खेलो इंडिया ने ग्रास रूट स्तर पर खेल प्रतिभाओं को तलाशने और उन्हें तराशने की दिशा में बेहतरीन काम किया है। अब इन गेम्स को यूनिवर्सिटी स्तर पर शुरू किया जा रहा है, जिससे अंडर-25 वर्ग में खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। ये इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यहां पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को ही भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तराशा जा सकता है। यहां तक कि ओलंपिक के लिए भी।

दुनियाभर में बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए प्रतिभा तलाशने का काम यूनिवर्सिटीज में ही किया जाता है। उदाहरण के लिए अमेरिका को ही ले लीजिए। वहां यूएसए नेशनल कॉलेजिएट एथलेटिक्स एसोसिएशन चैंपियनशिप का स्थान काफी अहम है। साल 2018-19 में अकेले डिविजन-1 में ही 1.82 लाख एथलीटों ने इसमें हिस्सा लिया था, जबकि ऐसी तीन डिविजन हैं। इसमें जीतने वाले प्रतिभागी सभी बड़े टूर्नामेंटों में देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। दुर्भाग्य से भारत में हम लंबे समय तक खेल और शिक्षा को दो अलग-अलग रूप में रखते रहे, जबकि ये महत्वपूर्ण है कि हम शिक्षण संस्थानों को केवल अकादमिक केंद्र के तौर पर न देखें, बल्कि सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर देखें, जहां खेल समेत विद्यार्थियों के करियर के हर पहलू को बढ़ावा दिया जा सके।

बच्चों पर काफी दबाव होता है। उन्हें पहले 10वीं और फिर 12वीं कक्षा के बारे में सोचना होता है। उसके बाद तरह-तरह के एंट्रेंस एग्जाम के बारे में। यूनिवर्सिटीज में कहीं अधिक सहज माहौल रहता है। उनके पास सुविधाएं होती हैं। जगह होती है। इसलिए वहां खेल में करियर बनाने के लिहाज से प्रतिभाशाली बच्चों का समर्थन किया जा सकता है। खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स जैसे मंच से यूनिवर्सिटीज भी प्रोत्साहित होंगी और छात्रों को खेलों को गंभीरता से लेने की दिशा में आगे बढ़ाएंगी। वहीं बच्चों के लिए भी ये बेहतरीन मौका है क्योंकि खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर बनाने की दिशा में ये यूनिवर्सिटी गेम्स मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।

भारत एक विशाल देश है, जिसमें प्रतिभाओं की कमी नहीं है। मगर इसकी तुलना में स्पोर्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर काफी कम हैं, लेकिन सरकार के प्रयासों के चलते अब अधिकतर लोग खेलों को करियर के तौर पर देख रहे हैं और अपना भी रहे हैं। मगर अब भी काफी अवसरों की जरूरत है और इस लिहाज से खेलों में युवा भारतीयों की महत्वाकांक्षाओं को पंख लगाने की दिशा में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटीज गेम्स शानदार मंच है। खासकर हम देख ही चुके हैं कि कैसे बैडमिंटन ने पिछले कुछ सालों में भारतीय दबदबे की एक नई इबारत लिख दी।