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बाबरी मस्जिद के नीचे मौजूद है विशाल मंदिरनुमा ढांचा: सीएस वैद्यनाथन

 नई दिल्ली।  Ayodhya Case अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में हिंदू पक्ष ने गुरुवार को स्कंद पुराण का हवाला देकर कहा कि राम जन्मस्थान के दर्शन से मोक्ष मिलता है। रामलला के वकील पीएस नरसिम्हा ने कहा कि स्कंद पुराण बाबर के भारत आने और वहां मस्जिद बनने से बहुत पहले का है जो उस स्थान की महत्ता साबित करता है। इसके अलावा हिंदू पक्ष ने विवादित ढांचे के नीचे मिले खंडहरों के निर्माण में चूना सुर्खी के प्रयोग को इस्लामिक काल का बताए जाने की मुस्लिम पक्ष की दलील का विरोध करते हुए कहा कि भारत में चूना सुर्खी का प्रयोग इस्लाम के आने से पहले से होता रहा है। हिंदू पक्ष की ओर से जवाबी दलीलें गुरुवार को पूरी कर ली गई। शुक्रवार को सुन्नी वक्फ बोर्ड की अपील पर राजीव धवन बहस करेंगे।

गुरुवार को भगवान रामलला विराजमान की ओर से वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन और पीएस नरसिम्हा ने बहस की। उन्होंने मुस्लिम पक्ष द्वारा एएसआइ रिपोर्ट पर उठाई गई आपत्तियों और राम जन्मस्थान का महत्व व हिंदुओं की उसके प्रति आस्था को साबित करने का प्रयास किया। इसके अलावा पूजा अर्चना का अधिकार मांग रहे गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार ने रामलला के मुकदमे का समर्थन करते हुए कहा कि आठ से 16 फरवरी 1950 के बीच कई मुसलमानों ने सिटी मजिस्ट्रेट के समक्ष हलफनामा दाखिल कर कहा था कि जन्मस्थान तोड़कर वहां बाबरी मस्जिद बनाई गई थी।

हलफनामों में यह भी कहा गया था कि मुसलमानों ने 1934 के बाद वहां नमाज नहीं पढ़ी और हिंदुओं का वहां कब्जा है। निर्मोही अखाड़ा की ओर से एसके जैन ने सेवादार होने का दावा करते हुए उन्हें सेवादारी और कब्जा सौंपे जाने की मांग की। श्रीराम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की ओर से पीएन मिश्रा और रंजना अग्निहोत्री ने अयोध्या जन्मस्थान भूमि को स्वयं देवता होना साबित करने के लिए स्कंद पुराण के हवाले से राम सेतु का जिक्र किया, जिसे स्कंद पुराण में देवता कहा गया है। हालांकि मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कड़ी आपत्ति जताई और उन्हें नई दलीलें पेश करने से रोका, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और मिश्रा से कहा कि जो चीजें हाई कोर्ट में नहीं कही थीं, उन्हें यहां न रखें। पीएस नरसिम्हा ने कहा कि दस्तावेजी साक्ष्यों को भी दो हिस्सों में बांटा जा सकता है।