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फैशन ट्रेंड में फिर से हो रहा बदलाव, लंदन फैशन वीक में छाया कांजीवरम, चंदेरी व बनारसी साड़ियों का जादू

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पाश्चात्य फैशन के प्रभाव में अगर भारतीय पारंपरिक साड़ियों की मांग कम हो गई थी तो अब उसी पाश्चात्य फैशन के प्रभाव में इन साड़ियों के प्रति फिर से दीवानगी बढ़ भी रही है।

लंदन में चल रहे लंदन फैशन वीक में भारतीय पारंपरिक हस्तनिर्मित साड़ियों का जलवा देखने को मिला। इसी के साथ फैशन इंडस्ट्री में एक बार फिर से बड़े बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। लोग न केवल साड़ियों की तरफ रुख कर रहे हैं बल्कि उन साड़ियों की मांग कर रहे हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में वहां के कारीगरों व बुनकरों द्वारा बनाई जाती हैं।

कुछ फैशन डिज़ाइनर इस तरह की साड़ियों को फिर से आधुनिक फैशन की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। फैशन डिजाइनर गौरव गुप्ता बनारसी से लेकर अन्य साड़ियों को फिर से ला रहे हैं।

लंदन फैशन वीक के बाद अब डिजाइनर्स फिर से साड़ियों के कलेक्शन पर काम करने लगे हैं। फैशन डिजाइनर शीतल श्रीवास्तव के मुताबिक इस तरह की साड़ियों की सराहना देखकर अब बाजारों में इनकी मांग और भी ज्यादा बढ़ने की संभावना है। फैशन एक्सपर्ट सीमा अग्रवाल का कहना है कि बनारसी, इकत, बांधनी, जामावर, पटोला, पैठनी आदि साड़ियों पर प्रिंट, कशीदाकारी और कटवर्क के साथ-साथ रूपांकनों से साड़ियों की तरफ फिर से रूझान बढ़ेगा। मथुरा के पेपर कटिंग क्राफ्ट सांझी, छत्तीसगढ़ की कला बस्तर, एमपी की कला गोंड, बिहार की मधुबनी और ओडिशा की पटचित्र के अलावा बनारसी साड़ियों को डिज़ाइनर सराहने लगे हैं।

दरअसल साड़ियां पहले सिर्फ ट्रेडिशनल मौकों पर ही पहनी जाती थीं लेकिन अब ग्रेसफुल और खूबसूरत नजर आने के लिए इन्हें डे आउटिंग से लेकर किटी पार्टी, ऑफिशियल पार्टी तक में लेडीज कॉन्फिडेंटली कैरी कर रही हैं। इतना ही नहीं साड़ी को अलग-अलग तरीकों से ड्रेप कर आप इंडो-वेस्टर्न लुक भी पा सकती हैं। यही वजह से इसकी बढ़ती पॉपुलैरिटी की।