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प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, मजदूर के बेटे की चित्रकारी छत्तीसगढ़ से दिल्ली तक पहुंची

रायपुर। प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती। प्रतिभा के आगे अच्छे-अच्छे घुटने टेकने को मजबूर हो जाते हैं। यही सोच लिए रायपुर के प्रोफेसर जेएन पांडेय स्कूल के 11वीं के छात्र ऋतिक पहरिया ने चित्रकारी में अपनी प्रतिभा दिखाई। ऋतिक मजदूर परिवार से हैं, उन्होंने बस्तर में महिला सशक्तिकरण के रोचक नजारे को कैनवास पर उकेरा है। इसे केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) की ओर से आयोजित कला उत्सव 2019-20 के लिए चुना गया है।

छत्तीसगढ़ से दिल्ली तक पहुंची चिन्हारी

ऋतिक अपनी चित्रकारी से प्रदेश की चिन्हारी दिल्ली कराने वाले हैं। दिसंबर में राष्ट्रीय स्तर की चित्रकला प्रतिस्पर्धा में ऋतिक हिस्सा लेंगे। वे अब ग्लोबल वार्मिग पर तस्वीर रचकर राष्ट्रीय स्तर पर दमखम दिखाएंगे। ऋतिक के पिता महासमुंद के बागबहरा में रहते हैं। मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। मां गृहिणी हैं। ऋतिक ने बताया कि वे रायपुर के टिकरापारा में किराए के मकान में रहते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर आने वाले बच्चों को पुरस्कार और अन्य प्रतिभागियों को पार्टिसिपेंट प्रमाण पत्र दिया जाएगा।

शिक्षकों ने बढ़ाया उत्साह

स्कूल के प्राचार्य एमआर सावंत ने बच्चों का हौसला बढ़ाया। चित्रकारी के लिए 25 बच्चों का समूह है। स्कूल परिसर की दीवारों में छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थल, भौगोलिक स्थिति, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे वैज्ञानिकों की तस्वीरें बनाई गई है, जो बच्चों का उत्साह बढ़ाती हैं।

प्राचार्य ने बच्चों में आत्मविश्वास जगाया

प्राचार्य ने बच्चों में आत्मविश्वास जगाया तो प्रतिभा ने जमीन पर खड़े होकर हाथ आगे बढ़ाए और आसमान को छू लिया। इसके पहले यहां रिक्शेवाले का बेटा लक्ष्मण ने सिंगर के तौर पर देश भर में पहचान बनाई। मजदूर और किसान के दो बेटे यहां से टॉपर बनकर निकल चुके हैं।