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पीएम मोदी ने वैश्विक कारोबारी समुदाय से कहा- भारत ने ढुलमुल रवैया पीछे छोड़ दिया

बैंकॉक, प्रेट्र। आसियान सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक कारोबारी समुदाय से कहा है कि भारत ने काम करने के पुराने ढुलमुल रवैये को पीछे छोड़ दिया है। दिग्गज कारोबारियों के एक समूह को संबोधित करते हुए मोदी ने वर्तमान भारत को निवेश के लिहाज से सबसे आकर्षक बाजारों में एक बताया। वे थाइलैंड में आदित्य बिड़ला ग्रुप के 50 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में उद्योगपतियों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने पिछले कुछ समय के दौरान सरकार द्वारा निवेश को बढ़ावा देने के प्रमुख उपायों का जिक्र भी किया। इनमें कॉरपोरेट टैक्स में कटौती अलावा फेसलेस इनकम टैक्स असेसमेंट जैसे उपाय प्रमुख थे। इनके मुताबिक इन उपायों से टैक्स मामलों में पारदर्शिता बढ़ी और करदाताओं को परेशान करने गुंजाइश खत्म हो गई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के भारत में मेहनती कर्जदाताओं के योगदान को सराहा जा रहा है और उसे मदद दी जा रही है। टैक्सेशन पर हमने काफी काम किया है। मुझे खुशी है कि इन प्रयासों के चलते भारतीय टैक्स व्यवस्था सबसे ज्यादा आम हितैषी होने वाली चुनिंदा व्यवस्थाओं में एक है। हम इसमें और सुधार के लिए प्रतिबद्ध हैं। मोदी का कहना था कि भारत में निवेश के लिए यह सबसे उपयुक्त समय है। इसकी वजह यह है कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ), ईज ऑफ डूइंग बिजनेस यानी कारोबारी सुगमता, ईज ऑफ लिविंग यानी जीवन की सुगमता और उत्पादकता में खासी बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरफ टैक्स दरों, लाल फीताशाही, भ्रष्टाचार और ऐसी अन्य बुराइयां खत्म होने के कगार पर हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘इन सभी बातों से स्पष्ट है कि निवेश के लिहाज से भारत दुनियाभर में सबसे आकर्षक बाजारों में एक है। पिछले पांच वर्षो में भारत में 286 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ है। यह पिछले 20 वर्षो में भारतीय बाजार मंे हुए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का करीब आधा हिस्सा है।’ देश की अर्थव्यवस्था को पांच लाख करोड़ डॉलर का आकार देने के लक्ष्य के बारे में प्रधानमंत्री का कहना था कि वर्ष 2014 में जब उनकी सरकार ने कार्यभार संभाला था तब अर्थव्यवस्था का आकार सिर्फ दो लाख करोड़ डॉलर था। लेकिन अगले पांच वर्षो में ही हम इसे करीब तीन लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचाने में कामयाब रहे। भारत ने पिछले पांच वर्षो में सफलता की कई कहानियां गढ़ी हैं। इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि हमने घिसे-पिटे नौकरशाही अंदाज में काम करना छोड़ दिया।