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नेताओं का हाल, पा लेने की बेचैनी और खो देने का डर

चंडीगढ़, [अनुराग अग्रवाल]। Haryana assembly Election 2019 में मतदान का दिन करीब आने के साथ ही नेताओं की कश्‍मकश बढ़ती जा रही है। नेताओं में पा लेने की बेचैनी और खो देने का डर, उनको चैन नहीं लेने दे रहा।  किसी को चुनाव जीतने की बेचैनी है तो किसी को हार जाने का डर सता रहा है। विश्वास, बेचैनी, चिंता और डर के बीच गुत्थमगुत्था राजनीतिक दलों के सामने इस बार खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती है। हरियाणा में 21 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव प्रचार शनिवार को थम गया।

हरियाणा में 2014 के चुनाव में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाली भाजपा को 2019 के चुनाव में कड़ी परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ृ रहा है। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सभी 10 सीटें जीती और 90 में से 79 विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल की। इस बढ़त तो बरकरार रखने की मंशा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने टीम मनोहर को 75 से अधिक विधानसभा सीटें जीतने का लक्ष्य दिया है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए खुद मोदी और शाह हरियाणा में ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं। भाजपा ने एक रणनीति के तहत आखिरी समय में मोदी व शाह की रैलियां बढ़ा दीं, जिनके जरिये पार्टी ने विपक्ष के लिए राजनीतिक चक्रव्यूह तैयार किया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खुद हर रोज आधा दर्जन से अधिक बड़ी जनसभाएं कर अपने शीर्ष नेतृत्व द्वारा दिए गए टारगेट को अचीव (हासिल) करने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देने के लिए पूरा जोर लगा दिया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खुद करनाल से चुनाव मैदान में हैं।