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नित्यानंद राय की जगह कौन बनेगा बिहार BJP अध्यक्ष ? ये हैं फ्रंट-रनर

नई दिल्ली- बिहार में नए बीजेपी (BJP) अध्यक्ष ढूंढने को लेकर माथापच्ची तेज हो चुकी है। मौजूदा प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष नित्यानंद राय (Nityanand Rai) केंद्र में गृह राज्यमंत्री का जिम्मा संभाल चुके हैं, लिहाजा उनकी जगह किसी दूसरे प्रभावी नेता को कमान सौंपा जाना है, जो अगले साल के आखिर में राज्य विधानसभा चुनाव में पार्टी को लोकसभा चुनावों की तरह ही ऐतिहासिक जीत दिला सके।

बिहार (Bihar) बीजेपी में नित्यानंद राय (Nityanand Rai)की जगह वो कौन दमदार चेहरा हो सकता है, दिल्ली से लेकर पटना (Patna) तक पार्टी के अंदरखाने अभी यही चर्चा गर्म है। जाहिर है कि अगले साल के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी सबसे पहली जातिगत समीकरणों को साधने की कोशिश करेगी, साथ ही साथ उस नेता का जिताऊ होना भी जरूरी है। दरअसल, 2014 के लोकसभा चुनाव की तुलना में इस चुनाव में भाजपा (BJP) को न केवल करीब 2.5 फीसदी ज्यादा वोट मिले, बल्कि पार्टी का स्ट्राइक रेट भी 100 फीसदी रहा। एनडीए (NDA) में बीजेपी ने अपने हिस्से की सभी 17 सीटों पर जीत हासिल की। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय (Nityanand Rai) तो दूसरी बार उजियारपुर (Ujiarpur) संसदीय क्षेत्र से जीते हैं। इसबार उन्होंने राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) को हराया है और उसी के इनाम स्वरूप उन्हें केंद्र में पहली बार मंत्री बनने का मौका भी मिला है। हालांकि, उन्होंने अभी तक प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं दिया है।

बीते लोकसभा चुनाव के नतीजों पर ध्यान दें, तो इस चुनाव में बीजेपी (BJP) को दलितों (Dalit), पिछड़ों (OBC) और अल्पसंख्यकों का भी खुलकर साथ मिला है। इसलिए पार्टी किसी नाम को फाइनल करने से पहले सभी समीकरणों को ध्यान में जरूर रखेगी। आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश कुमार सिंह ने कहा है कि, “बीजेपी में प्रदेश स्तर के कई ऐसे नेता हैं, जिनकी सत्ता और संगठन पर बराबर पकड़ है। लिहाजा, इन्हीं लोगों में से किसी एक को नित्यानंद राय का उत्तराधिकारी बनाया जा सकता है।” पार्टी का इरादा यह भी है कि वह प्रदेश में गठबंधन के तिलिस्म को भी जड़ से तोड़ दे। इसलिए, वह दलितों के साथ-साथ पिछड़े और अत्यंत पिछड़ों को भी पूरी तरह से अपने पाले में करने के लिए जोर लगाना चाहती है। लेकिन, इस चक्कार में अगड़ी जातियां भी नाराज न हों, पार्टी इसका भी ख्याल रखना चाहेगी।

खबरें हैं कि बिहार (Bihar) बीजेपी (BJP) के अध्यक्ष के लिए जिन नामों का जिक्र चल रहा है, उसमें लोकसभा चुनाव जीतने वाले लेकिन, मंत्री नहीं बन सकने वाले किसी एक नाम पर मुहर लग सकती है। ये नाम हैं- पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी (Rajiv Pratap Rudy), जनार्दन सिंह सिग्रीवाल (Janardan Sigriwal) और संजय जायसवाल (Sanjay Aggarwal)। यही नहीं बीजेपी के एक नेता ने नाम नहीं बताने की शर्त पर ये भी कहा कि मोदी जी ने पिछली सरकार में मंत्री रहे जिन दो सांसदों को इसबार चांस नहीं दिया है, उनमें से भी किसी को एक को संगठन का जिम्मा मिल सकता है। ये नाम हैं- पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव (Ramkripal Yadav) और राधामोहन सिंह (Radhamohan Singh)। इन नेता का कहना है कि नित्यानंद राय की जगह जातीय समीकरण ठीक रखने के हिसाब से रामकृपाल के नाम पर मुहर लगाई जा सकती है, क्योंकि दोनों एक ही बिरादरी के हैं। इसके अलावा झारखंड में पार्टी संगठन का जिम्मा संभाल चुके राजेंद्र सिंह (Rajendra Singh) को पार्टी की कमान सौंपी जा सकती है।