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धीमी चाल तेज कर देती है मृत्यु की रफ्तार, दिमाग की आयु से है गति का सीधा संबंध

वाशिंगटन, प्रेट्र। अक्सर देखा जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ व्यक्ति की शारीरिक गतिविधियों पर भी असर दिखना शुरू हो जाता है। 45 वर्ष के लोगों के चलने की गति का अध्ययन कर शोधकर्ताओं ने इसके पीछे के कारणों का पता लगाने का दावा है। शोधकर्ताओं ने कहा कि 45 साल की उम्र के बाद लोगों की अन्य शारीरिक गतिविधियों के साथ-साथ चलने की गति भी प्रभावित हो जाती है क्योंकि चलने की गति का संबंध हमारे मस्तिष्क से होता है। यदि हमारी चाल प्रभावित हो रही है तो इसका मतलब है कि हमारे मस्तिष्क की उम्र बढ़ रही है।

इस अध्ययन के शोधकर्ताओं में अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी के शोधार्थी भी शामिल थे। अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि धीमी गति से चलने वाले लोगों के फेफड़े, दांत और इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) भी तेज चलने वाले लोगों के मुकाबले कमजोर था। जामा नेटवर्क ओपन नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, बूढ़े रोगियों को आमतौर पर इस तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है। लेकिन कम उम्र में इस तरह की समस्याओं से घिरे रहना चिंताजनक है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि न्यूरोकांग्निटिव परीक्षण के जरिये यह पता लगया जा सकता है कि भविष्य में किन लोगों की चलने की गति कम हो सकती है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के आइक्यू स्तर, भाषा समझने व निराशा सहने की क्षमता, मोटर कौशल और भावनात्मक नियंत्रण का अध्ययन कर यह पता लगाया जा सकता है कि 45 वर्ष की उम्र में उनकी चलने की गति कैसी होगी।