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देश के इस सबसे स्वच्छ शहर में प्लास्टिक कचरे का ऐसा समाधान, बेहद खास है कार्यप्रणाली

देश के स्वच्छ शहरों में शामिल अंबिकापुर प्लास्टिक पन्नियों के कचरे से मुक्त है,क्योंकि यहां की महिलाओं ने इसे आय का बड़ा जरिया बना लिया है। शहर के एसएलआरएम सेंटरों में हर रोज एकत्र होने वाले करीब 800 किलो प्लास्टिक की पन्नियो को सेनेटरी पार्क में दो कंपनियों द्वारा स्थापित मशीन से ग्रेनुएल (प्लास्टिक पन्नियों का दाना) बनाने का काम चल रहा है।दो साल में यहां की महिलाओं ने शहर को न सिर्फ प्लास्टिक पन्नियों से मुक्त किया है बल्कि अब तक 13 लाख से अधिक कमा चुकी है। यहां तैयार ग्रेनुएल प्लास्टिक का दाना नोएडा और इंदौर की कंपनियां हाथों-हाथ ले जाती हैं। इससे दोबारा प्लास्टिक के खिलौने, बाल्टी, कुर्सियां सहित नाना प्रकार की चीजें बन रहीं हैं।

बता दें कि अंबिकापुर दो लाख से लेकर दस लाख की आबादी वाले शहरों में सबसे स्वच्छ शहर का तमगा हासिल कर चुका है। स्वच्छता का हर नवाचार यहां से शुरू हुआ है जिसे कई शहरों ने लागू किया है। अंबिकापुर माडल को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,उप राष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू,शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पूरी सहित देश के नामचीन हस्तियों ने सराहा है। अंबिकापुर के कचरा प्रबंधन नवाचार ने हर किसी को प्रभावित किया है।

यहां साढे चार सौ से अधिक महिलाएं कचरा प्रबंधन कार्य में लगी हैं। सूखा और गीला कचरा अलग कर, गीले कचरे से कंपोस्ट खाद और सूखा कचरा जो कबाड़ के तौर पर निकलता है उसे बेचकर आय अर्जित कर रही हैं। यही नहीं अंबिकापुर शहर कचरा मुक्त शहर काम पुरस्कार भी इन महिलाओं के कार्यों की बदौलत हासिल कर चुका है। अंबिकापुर शहर में प्लास्टिक पन्नियों का प्रयोग प्रतिबंधित है। इसके बाद भी यदि लोग घरों में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसे सड़कों पर व नालियों में फेंक ना यहां के लिए एक अपराध है।