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जावड़ेकर बोले- बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने इसे जंगल नहीं माना, करेंगे विकास और प्राकृति का संरक्षण

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मुंबई, एएनआइ। Aarey Forest Protest गोरेगांव की आरे फॉरेस्ट में पेड़ की कटाई के मामले में शुक्रवार को जब पेड़ काटना शुरु किया गया तो लोगों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा। शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी को शनिवार को आरे फॉरेस्ट में विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने हिरासत में लिया। एक एक्टिविस्ट को मरोल मरोसी रोड से आरे फॉरेस्ट में प्रवेश करने पर एक पेड़ को गले लगाते देखा गया जहां धारा 144 लगाई गई है।

जावड़ेकर ने दिल्‍ली मेट्रो का दिया उदाहरण

आरे फॉरेस्ट को लेकर जमकर राजनीति हो रही है। इस बीच पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, यह जंगल नहीं है। उन्‍होंने देश की राजधानी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब दिल्ली मेट्रो का काम शुरू हुआ था, तब 20-25 पेड़ काटे गए। इसका विरोध हुआ, लेकिन बाद में एक पेड़ के बदले पांच पेड़ लगाए गए और आज वहां का नजारा अलग है। अभी तक दिल्ली मेट्रो के 271 स्टेशन बने हैं और इस दौरान पेड़ कटे भी और काफी लगे भी। अगर आज की स्थिति का जायजा लिया जाए, तो दिल्‍ली में पेड़ों की संख्या बढ़ी है। इसे कहते हैं विकास और प्रकृति का संरक्षण, जिसमें विकास के साथ-साथ प्राकृति का भी विकास होता है।

चिपको आंदोलन की यादें हुईं ताजा

मुंबई के आरा में ‘चिपको आंदोलन’ की यादों को फिर ताजा कर दिया। यहां एक सामाजिक कार्यकर्ता पेड़ से लिपट कर खड़ी हो गई। बता दें कि चिपको आंदोलन पर्यावरण की रक्षा के लिए किया गया था। इस आंदोलन की शुरुआत 1973 में उत्‍तराखंड के चमोली जिले से भारत के लोकप्रिय पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा, चंडीप्रसाद भट्ट और गौरा देवी के नेतृत्‍व में हुई थी। इस आंदोलन की खास बात यह थी कि इसमें पुरुषों से ज्‍यादा महिलाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई और जब हाथों में कुल्‍हाड़ी लेकर लोग पेड़ों को काटने आए, तो महिलाएं पेड़ों से चिपक कर खड़ी हो गईं। इसीलिए आंदोलन का नाम ‘चिपको आंदोलन’ पड़ गया।