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चेतेश्वर पुजारा ने कैसे बने शांत और निडर, उनके पिता ने किए कई खुलासे

नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहुंची भारतीय टीम की योजना थी कि उसे एक और टेस्ट सीरीज जीतकर वापस जाना है, जबकि कंगारुओं की योजना थी कि किसी भी तरह उन्हें चेतेश्वर पुजारा को रोकना है। यही कारण था कि मिशेल स्टार्क, जोश हेजलवुड और पैट कमिंस सिर्फ पुजारा के शरीर को निशाना बना रहे थे। पूरी सीरीज, खासकर चौथे टेस्ट की दूसरी पारी में पुजारा ने हेलमेट, छाती, बांह, अंगुली और जांघों में गेंदें झेलीं, लेकिन वह डिगे नहीं।

सीरीज के दूसरे मुकाबले से ही पुजारा की धीमी बल्लेबाजी की आलोचना होने लगी, लेकिन न वह आलोचकों के सामने डिगे और न ही ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज उन्हें तोड़ पाए। उन्होंने चौथे टेस्ट की दूसरी पारी में 211 गेंद पर 56 रन रन बनाकर अपने करियर का सबसे धीमा अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने इसी सीरीज में अपने सबसे धीमे अर्धशतक का रिकॉर्ड तोड़ा। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज उन्हें तोड़ने की कोशिश कर रहे थे और वह विपक्षी आक्रमण को थकाने में जुटे थे।

पुजारा ने चार टेस्ट मैचों में सबसे ज्यादा 928 गेंदें यानी 154.4 ओवर खेले। उन्होंने 274 रनों का योगदान भी दिया। अच्छी बात यह रही कि भारतीय टीम यह ऐतिहासिक सीरीज जीती और उनकी इन उपयोगी पारियों का मूल्य क्रिकेट को जीने वालों के साथ इस खेल के जानने वालों को भी पता चला गया। इसके साथ ही पता चल गया कि उन पर चाहे जितने हमले हों वह दिमागी संतुलन नहीं खोते। इसी ने उन्हें शांत होने के साथ निडर बनाया है।