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गृह मंत्रालय ने राहुल गांधी की नागरिकता विवाद की जानकारी देने से किया इंकार

नई दिल्ली। होम मिनिस्टरी ने कांग्रेस प्रेसीडेंट राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल उठाने वाली शिकायत के बाद उन्हें दिए गए अपने नोटिस की जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया है। गृह मंत्रालय ने आरटीआइ कानून का हवाला देते हुए कहा कि आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) (एच) और (जे) के तहत मांगी गई जानकारी का खुलासा नहीं किया जा सकता। मंत्रालय ने कहा कि, ये नियम जांच बाधित करने वाली जानकारी साझा करने से रोकते हैं।

अप्रैल में गृह मंत्रालय ने गांधी को एक नोटिस दिया था। जिसमें कहा था कि वह उनकी नागरिकता पर सवाल खड़े करने वाली शिकायत पर अपनी ‘तथ्यात्मक स्थिति’ 15 दिनों के भीतर में स्पष्ट करें। यह शिकायत भाजपा नेता एवं राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से की गई थी। एक आरटीआई आवेदन में मंत्रालय से राहुल गांधी को जारी किए गए नोटिस की एक प्रति प्रदान करने और उनसे प्राप्त जवाब का विवरण प्रदान करने के लिए कहा था।

गृह मंत्रालय ने कहा कि, मांगी गई जानकारी का खुलासा आरटीआई कानून की धारा 8(1)(एच) और (जे) के तहत नहीं किया जा सकता। धारा 8 (1)(एच) ऐसी सूचना मुहैया कराने से रोकती है जिससे जांच की प्रक्रिया या अपराधियों के हिरासत में रुकावट पैदा होती हो। यहीं नहीं प्रावधान (जे) उस जानकारी को देने से भी रोकता है जो निजी सूचना के खुलासे से संबंधित हो और जिसका जो किसी व्यक्ति की निजता में अवांछित हस्तक्षेप करती हो। अप्रैल में राहुल गांधी को भेजे गए नोटिस में गृह मंत्रालय के निदेशक (नागरिकता) बीसी जोशी ने भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी की शिकायत का हवाला दिया था।

पत्र का हवाला देते हुए गृह मंत्रालय ने कहा है कि राहुल गांधी ब्रिटेन में 2003 में पंजीकृत कंपनी बैकऑप्स लिमिटेड के निदेशकों में शामिल थे। इसमें स्वामी ने 2003 में खोली गई कंपनी बैकॉप्स लिमिटेड का जिक्र किया है। स्वामी के अनुसार, इस कंपनी में राहुल गांधी निदेशक और सचिव थे। 10 अक्टूबर 2005 और 31 अक्टूबर 2006 को कंपनी की ओर से भरे गए वार्षिक रिटर्न में राहुल गांधी की जन्मतिथि 19 जून 1970 नागरिकता ब्रिटिश बताई गई थी। यही नहीं, 17 फरवरी 2009 में जब कंपनी को बंद किया गया, तब भी नागरिकता ब्रिटिश बताई थी। जोशी ने एक पखवाड़े में राहुल गांधी को अपनी नागरिकता को लेकर अपना पक्ष गृह मंत्रालय को अवगत कराने को कहा था।