EBM News Hindi

क्या जीत की हैट्रिक लगाएंगे अनिल विज?

अंबाला कैंट। हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 के लिए राज्य की सभी 90 सीटों पर 21 अक्टूबर को मतदान संपन्न हो चुका है। राज्य के करीब 1.82 करोड़ मतदाताओं ने 90 विधानसभा सीटों के लिए 1169 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद कर दी है। आज इनकी किस्मत का पिटारा खुलेगा। कुछ घंटों बाद रुझान सामने आने लगेंगे। दोपहार बाद तस्वीर साफ हो जाएगी कि वेणु सिंह यहां इतिहास दोहराने में कामयाब रहती हैं या एक बार फिर से विज इस सीट पर भाजपा के विजय रथ पर सवार होंगे।

अंबाला कैंट विधानसभा सीट पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश सरकार में मंत्री अनिल विज उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला कांग्रेस की महिला उम्मीदवार वेणु सिंह अग्रवाल से है। इंडियन नेशनल लोकदल (IND) ने इस सीट पर अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है। इनेलो ने इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार चित्रा सिंह का समर्थन किया है। इनेलो की सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल ने भी चित्रा को अपना समर्थन दिया हुआ है।

कांग्रेस ने इस सीट पर खोला था खाता

अंबाला कैंट सीट हरियाणा के सबसे पुराने विधानसभा क्षेत्रों मे से एक है। पहली बार 1967 में यहां से कांग्रेस के डीआर आनंद चुनाव जीत विधानसभा पहुंचे थे। इस सीट पर सबसे ज्‍यादा बार कांग्रेस के प्रत्‍याशियों ने जीत दर्ज की है। वर्ष 2014 में यहां से भाजपा विधायक अनिल विज 49.21 फीसद मतों के साथ जीते थे। उन्हें कुल 66605 वोट मिले थे। अनिल विज चार बार इस सीट से विधायक रह चुके हैं। लिहाजा इस बार के चुनाव में उनके सामने पांचवीं बार भाजपा का विजय रथ दौड़ाने की चुनौती है।

2014 में दूसरे नंबर पर थी कांग्रेस

वर्ष 2014 में अंबाला कैंट सीट पर दूसरे नंबर कांग्रेस उम्मीदवार चौधरी निर्मल सिंह थे। उन्हें 51143 वोट मिले थे। कांग्रेस ने इस बार चौधरी निर्मल सिंह की जगह प्रदेश की महिला इकाई की वेणु सिंह अग्रवाल पर भरोसा जताया है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वह मोदी लहर से कांग्रेस की नैय्या को पार लगा, इस सीट पर पार्टी की सबसे ज्यादा जीत के इतिहास को दोहराने में सफल हों।

दो बार चुनीं गईं थीं सुषमा स्वराज

अंबाला कैंट विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास वर्ष 1976 से शुरू होता है। तब इस सीट पर कांग्रेस के डीआर आनंद ने जीत दर्ज की थी। वर्ष 1968 में भाजपा के भगवान दास ने इस सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1972 में कांग्रेस के हंसराज सूरी यहां से विधायक बने थे। भाजपा की दिवंगत नेता सुषमा स्वराज भी वर्ष 1977 और 1987 में इस सीट से विधानसभा पहुंचीं थीं। वर्ष 1982 में काग्रेस के रामदास धमीजा ने जीत दर्ज की थी। 1991 में फिर से कांग्रेस के ब्रिज आनंद ने यहां से जीत दर्ज की थी। 1996 में अनिल विज यहां से पहली बार जीते थे, तब उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था। वर्ष 2000 में अनिल विज ने यहां दूसरी बार जीत दर्ज की थी। वर्ष 2005 में कांग्रेस के देवेंद्र बंसल ने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद भाजपा ने अनिल विज को 2009 और 2014 के चुनाव में यहां से अपना उम्मीदवार बनाया। दोनों बार उन्होंने जीत दर्ज की।