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कितनी मुश्किल उन मांओं की लड़ाई जिनकी बेटियों का रेप हुआ

“पुलिया के नीचे वो सिकुड़ी-सी बैठी थी. खुद को समेटे हुए. एक झीने से दुपट्टे से ख़ुद को ढकने की कोशिश करती हुई. उसके पास में ही खाने का डिब्बा खुलकर बिखरा पड़ा था. उसके कपड़े मिट्टी में सने हुए. पास में उसकी चप्पलें उल्टी पड़ी थीं. इतनी चोट थी देह पर… कुछ भी भूला नहीं है. मां के लिए आसान थोड़े होता है अपनी बेटी को ऐसे देखना.”

कविता (बदला हुआ नाम) की स्कूल जाने वाली बेटी के साथ चार बार कथित तौर पर रेप हुआ. पहली बार जब वो लगभग दस साल की थीं, उसके बाद तीन बार और.

कविता बताती हैं कि रेप करने वाला उनके गांव का ही एक लड़का था. जो पहले उनकी बेटी को स्कूल के रास्ते में आते-जाते तंग किया करता था. एक दिन जब पति-पत्नी दोनों काम से घर से बाहर थे, उसने घर में घुसकर उनकी बेटी का बलात्कार किया.

फिर एक बार खेत में, एक बार पुलिया के पास और एक बार और… बेटी के साथ हुई रेप की ये अलग-अलग घटनाएं कविता के लिए कभी ना भूलने वाला दर्द है.

वो बताती हैं कि उनकी बेटी ने तीन बार आत्महत्या करने की भी कोशिश की.