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कभी कट्टी तो कभी झप्पी लेते भारत-पाकिस्तान के नेताः वुसअत की डायरी

भारत और पाकिस्तान के नेतृत्व की सबसे अच्छी बात यह है कि एक की ओर से अच्छे भाषण या प्रदर्शन का जवाब मिले ना मिले पर बुराई का जवाब बुराई से तुरंत दिया जाता है.

अब यही देखिए कि चुनाव नतीजों से सिर्फ़ एक दिन पहले, सुषमा स्वराज जी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूह क़ुरैशी का मुंह मीठा करवाया.

अगले रोज़ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने नरेंद्र मोदी को चुनाव में करारी जीत पर बधाई दी.

मगर इस बधाई के सिर्फ़ चार दिन बाद दिल्ली में पाकिस्तानी हाई कमिशन की इफ़्तार पार्टी में आने वाले मेहमानों के स्वागत के लिए, जहां हाई कमीशन के कर्मचारी गेट पर थे वहीं बाहर की तरफ़ हथियारबंद दिल्ली पुलिस और सादे कपड़ों वाले मेहमानों का इंतज़ार कर रहे थे.उन्होंने केवल आने वाले मेहमानों को ही नहीं बल्कि गाड़ियों को भी अंदर से चेक किया और तस्वीरें खींची.

उससे पहले 23 मार्च को भी हाईकमिश्नर ने जब पाकिस्तान दिवस की ख़ुशी में रिसेप्शन रखा था तो, आने वाले भारतीय मेहमानों को सादा कपड़ों वाले समझाते रहे कि उन्हें सरकार की तरह इस रिसेप्शन का बायकॉट करना चाहिए.

दिल्ली में पाकिस्तानी दूतावास की इफ़्तार पार्टी में जो कुछ हुआ उसका असर इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास के प्रोग्राम में भी दिखा.

यानी भारतीय हाई कमीशन ने एक पांच सितारा होटल में पाकिस्तानी नेताओं, पत्रकारों और सिविल सोसाइटी के मेहमानों को दो दिन पहले इफ़्तार पार्टी के लिए बुलाया.

होटल के गेट पर आदरणीय मेहमानों का स्वागत सबसे पहले एंटी टेररिस्ट स्कवाड और सादा कपड़ों वालों ने किया.