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आज RCEP पर अंतिम फैसले की उम्मीद, भारत अपने रुख पर कायम

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। भारत दुनिया के सबसे महत्वाकांक्षी कारोबारी समझौतों में एक आरसेप में शामिल होगा या नहीं, इससे सोमवार को पर्दा उठ जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में बैंकॉक पहुंची उच्चस्तरीय टीम वहां रविवार को भी इस मसले पर हुई चर्चाओं में घरेलू हितों की रक्षा पर डटी रही। नवीनतम सूचनाओं के मुताबिक भारत अभी भी आशंका है कि इस कारोबारी समझौते पर हस्ताक्षर के बाद उसका बाजार सस्ते उत्पादों से पट सकता है।

यह एक बड़ी अड़चन के तौर पर चिन्हित हो रहा है। यही वजह है कि आसियान देशों के प्रमुखों के साथ बैठक में पीएम मोदी ने अपने भाषण में आरसेप (रजनल कंप्रेहेंसिव इकोनोमिक पार्टनरशिप) का जिक्र भी नहीं किया है।आरसेप को लेकर एक हफ्ते से बैंकॉक में भी सभी सदस्य देशों के वाणिज्य मंत्रलय के अधिकारियों के बीच विमर्श का दौर चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक अमेरिका के साथ ट्रेड वार में उलझा चीन हर कीमत पर इस बार आरसेप पर अंतिम समझौते का दबाव बना रहा है। लेकिन भारत की तरफ से जो मुद्दे उठाए जा रहे हैं उसका अभी तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।

ऐसे में एक विकल्प यह भी बताया जा रहा है कि फिलहाल भारत के बगैर ही समझौते पर आगे बढ़ा जाए। लेकिन कई दूसरे सदस्य इस विकल्प को लेकर बहुत उत्साहित नहीं है। इनका कहना है कि भारत की अनुपस्थिति में चीन पूरी तरह से इस क्षेत्र पर हावी रहेगा। ऐसे में इंडोनेशिया, थाइलैंड जैसे देश भारत को मनाने की कोशिशों में जुटे हैं।

दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान जैसे देश आरसेप को भारत के बगैर आगे बढ़ाने को तैयार हैं।उधर, भारत के सबसे बड़े उद्योग चैंबर सीआइआइ के प्रेसिडेंट विक्रम किलरेस्कर ने चीन की तरफ से आयात बढ़ने की आशंका को एक संभावित समस्या बताया है। लेकिन यह भी कहा है कि हमारा फैसला सिर्फ आयात के आधार पर नहीं होना चाहिए बल्कि निवेश से जुड़ी संभावनाओं को भी केंद्र में रखना चाहिए।

इस सवाल पर विचार होना चाहिए कि क्या लंबी अवधि में यह समझौता देश में निवेश बढ़ाने में सहायक साबित होगा। यह दुनिया का सबसे मजबूत आर्थिक समझौता होगा और इन देशों में अगले 10-15 वर्षो में भारतीय कंपनियों के लिए काफी संभावनाएं पैदा हो सकती हैं। वर्ष 2017 में आरसेप के सदस्य देशों में दुनिया की 47.6 फीसद आबादी थी। वैश्विक अर्थव्यवस्था के 31.6 प्रतिशत हिस्से पर इन देशों का कब्जा था।